नानी बाई रो मायरोः आगरा में आस्था व भक्ति का संचार कर गई ‘नरसी भात’ की कथा
आगरा। भक्ति, वैराग्य और आत्मचिंतन से ओतप्रोत नानी बाई रो मायरो : कथा नरसी भात ने आरबीएस कॉलेज सभागार को श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। श्री हरि सत्संग समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कथा में व्यास पीठ से श्री गौरदास जी महाराज ने नरसी भगत की निष्काम भक्ति, प्रभु कृपा और जीवन दर्शन को भावपूर्ण प्रसंगों के माध्यम से श्रोताओं के हृदय में उतार दिया। भक्ति संगीत की मधुर स्वर लहरियों ने वातावरण को भक्तिरस में डुबो दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि राकेश गर्ग, विशिष्ट अतिथि प्रो. विजय श्रीवास्तव तथा श्री हरि सत्संग समिति व महिला समिति के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित किया। व्यास पीठ पर विराजमान गौरदास महाराज को संयोजक संजय गोयल के अनुसार अध्यक्ष शांतिस्वरूप गोयल सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिकों ने माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया।
कथा से पूर्व “निताई गौर हरि बोल” के जयघोषों के बीच महाराज जी ने भक्ति संगीत की प्रस्तुति दी- “नरसी के सांवरिया श्याम, सांवरिया के नरसी…”। उन्होंने कहा कि भारत पुण्यभूमि है, जहां भक्ति परंपरा युगों से चली आ रही है। नरसी भगत की भक्ति इतनी निष्कलंक थी कि स्वयं भगवान उनके यहां भात पहनाने पहुंचे। प्रभु की लीला काल के बंधन से परे है—पूर्व जन्मों के कर्म वर्तमान को और वर्तमान के कर्म भविष्य को आकार देते हैं। यह शरीर धर्मशाला समान है, इसलिए जब तक देह है, गोविंद का स्मरण आवश्यक है।
गौरदास जी महाराज ने नरसी भगत के जीवन प्रसंगों का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि बाल्यकाल में कठिनाइयों, भाभी द्वारा मिले अपमान और त्याग ने ही उन्हें प्रभु-सान्निध्य तक पहुंचाया। इंद्रेश्वर महादेव मंदिर, शिव कृपा, वृंदावन की रासलीला और राधा-कृष्ण की लीलाओं के प्रसंगों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि नरसी को ठोकर न मिली होती, तो ठाकुर का साक्षात्कार न होता।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक आरती के साथ हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सेवा का संकल्प
श्री हरि सत्संग समिति द्वारा चलाए जा रहे प्रकल्पों के माध्यम से नक्सल प्रभावित वनवासी क्षेत्रों में भटके युवाओं को सही मार्ग पर लाकर राष्ट्र और समाज के रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जा रहा है। संयोजक संजय गोयल ने बताया कि संस्था की स्थापना 1989 में हुई तथा 1996 से कथाओं के माध्यम से अर्जित धन को वनवासी कल्याण में लगाया जा रहा है। हाथरस मार्ग पर आवासीय प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण प्रगति पर है, जहां वनवासी बहनों को राम-कृष्ण कथा एवं भारतीय संस्कृति-संस्कारों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आरबीएस कॉलेज सभागार में यह कथा 22 व 23 दिसंबर को भी दोपहर 2:30 बजे से सायं 6:00 बजे तक सुनाई जाएगी।