झूले पर झपकी और आइस पॉप का मजा: भालू 'जैस्मीन' ने पूरे किए स्वतंत्रता के 22 साल!

वाइल्डलाइफ एसओएस के आगरा में कीठम स्थित भालू संरक्षण केंद्र में जैस्मीन भालू की कहानी हमें यह समझाती है कि जानवरों के लिए भी सम्मान और करुणा से भरी ज़िंदगी संभव है। झूले की नींद, स्वादिष्ट फल और सुकून भरे पल, जैस्मीन की 22 साल की यह यात्रा वाइल्डलाइफ एसओएस के अथक प्रयासों और मानवीयता की जीत का प्रतीक है।

Jul 18, 2025 - 15:22
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झूले पर झपकी और आइस पॉप का मजा: भालू 'जैस्मीन' ने पूरे किए स्वतंत्रता के 22 साल!
आगरा के भालू संरक्षण केंद्र में जैस्मीन भालू, जिसने आजादी के 23 साल पूरे कर लिए हैं।

आगरा। साल 2003 में उत्तर प्रदेश की सड़कों से एक मासूम स्लॉथ भालू शावक को 'डांसिंग भालुओं' की अमानवीय प्रथा से मुक्त कर वाइल्डलाइफ एसओएस ने बचाया था। उसका नाम रखा गया जैस्मीन  और आज, 22 वर्षों बाद वह आगरा स्थित भालू संरक्षण केंद्र की सबसे उम्रदराज़ और प्रिय सदस्यों में से एक है। उसकी कहानी केवल एक जानवर की मुक्ति नहीं, बल्कि करुणा, पुनर्वास और मानवीयता की विजय गाथा है।

बचपन का दर्द, जीवन की शुरुआत

रेस्क्यू के वक्त जैस्मीन एक छोटी बच्ची थी, जिसे नाचने के लिए मजबूर किया जाता था। उसकी थूथन में गर्म लोहे से छेद किया गया था और रस्सी डाल दी गई थी, जिससे उसे यातनाओं के बीच ‘मनोरंजन’ का साधन बना दिया गया। अपनी मां से अलग की गई जैस्मीन का बचपन पीड़ा में बीता, लेकिन आगरा भालू संरक्षण केंद्र ने उसकी ज़िंदगी को पूरी तरह बदल दिया।

जैस्मीन की वर्तमान दिनचर्याः खेल, स्वाद और सुकून

आज जैस्मीन एक जिज्ञासु और कोमल स्वभाव की बुज़ुर्ग भालू है जिसे दीमक और कीड़े-मकोड़े खोदकर खाना बहुत पसंद है। उसकी दिनचर्या में हनी-फिल्ड बैरल फीडर से खेलना, नारियल और खजूर चबाना और गर्मी में आइस पॉप्सिकल्स का आनंद लेना शामिल है। अपने झूले पर लेटकर वह एयर कूलर की ठंडी हवा में झपकी लेती है। यही उसका सबसे पसंदीदा पल होता है।

22 वर्षों की सेवा और स्नेह टीम का भावुक अनुभव

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, एक नन्हीं जैस्मीन को एक वरिष्ठ भालू में बदलते देखना हमारे लिए एक भावनात्मक यात्रा रही है। उसकी ताकत और सहनशीलता प्रेरणादायक है।

संस्था के पशु चिकित्सा सेवा उप निदेशक डॉ. इलियाराजा एस ने कहा, प्रत्येक भालू की देखभाल का तरीका अलग होता है। जैस्मीन की दो दशक की सेवा हमारे लिए जिम्मेदारी और आत्मिक संतोष दोनों लेकर आई है।

सह-संस्थापक गीता शेषमणि ने कहा, जैस्मीन की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही देखभाल और मानवीयता से कितनी बड़ी तकलीफों को भी पराजित किया जा सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor