नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, मिडिल ईस्ट तनाव का असर, लोगों पर महंगाई की दोहरी मार
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच आगरा में निजी ईंधन रिटेलर नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। कंपनी के पंपों पर पेट्रोल 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। अब आगरा में नायरा पंपों पर सादा पेट्रोल 99.62 रुपये और डीजल 90.41 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। फिलहाल इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम ने दाम नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि जल्द उनके रेट भी बढ़ सकते हैं। पंप मालिकों का कहना है कि तेल की कमी नहीं है, लेकिन सीमित सप्लाई और लोगों की घबराहट में ज्यादा खरीदारी से दबाव बढ़ रहा है। देहात क्षेत्रों में सप्लाई प्रभावित होने से वहां परेशानी ज्यादा बताई जा रही है।
एलपीजी की किल्लत के बीच पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये महंगा, आगरा के नायरा पंपों पर नए रेट लागू, देहात में सप्लाई प्रभावित होने से बढ़ी चिंता
आगरा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है। एक तरफ लोग पहले से ही एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और अनिश्चित सप्लाई से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर अब पेट्रोल और डीजल के दाम में हुई बढ़ोतरी ने महंगाई का नया झटका दे दिया है। आगरा में निजी ईंधन रिटेलर कंपनी नायरा एनर्जी ने अपने पेट्रोल पंपों पर नए रेट लागू कर दिए हैं, जिसके बाद वाहन चालकों और रोजमर्रा के खर्च से जूझ रहे परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।
आगरा में नायरा एनर्जी के पंपों पर अब पेट्रोल 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद शहर में ईंधन की कीमतों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोगों का कहना है कि पहले ही रसोई गैस की दिक्कत, सब्जियों और जरूरी सामान की महंगाई से राहत नहीं मिल रही थी, अब ईंधन की कीमतों में उछाल ने घरेलू बजट को और बिगाड़ दिया है।
नए रेट लागू, अब इतना महंगा हुआ ईंधन
नायरा एनर्जी के आगरा स्थित पंपों पर लागू नए रेट के अनुसार सादा पेट्रोल 99.62 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.41 रुपये प्रति लीटर हो गया है। जबकि इससे पहले सादा पेट्रोल 94.62 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.41 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था। यानी एक ही झटके में पेट्रोल पर 5 रुपये और डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाला है।
अभी सरकारी कंपनियों ने नहीं बढ़ाए दाम, लेकिन बढ़ी आशंका
फिलहाल राहत की बात यह है कि इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों ने अभी तक सादा पेट्रोल और डीजल के रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि बाजार में यह चर्चा तेज है कि निजी कंपनी द्वारा कीमतें बढ़ाने के बाद आने वाले दिनों में सरकारी तेल कंपनियां भी अपने दामों की समीक्षा कर सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो महंगाई का असर और व्यापक हो सकता है, क्योंकि सरकारी कंपनियों के पंपों से बड़ी संख्या में उपभोक्ता जुड़े होते हैं।
पंप मालिकों का दावा- तेल की कमी नहीं, लेकिन डर से बढ़ी खरीदारी
पंप संचालकों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह संकट वाली नहीं है, लेकिन सप्लाई सिस्टम में बदलाव से दबाव जरूर बना है। उनके मुताबिक तेल कंपनियों ने अब पंपों को पहले की तरह खुली मांग और रिजर्व क्षमता के आधार पर सप्लाई देने के बजाय, रोजाना बिक्री के अनुपात में सप्लाई शुरू कर दी है। पहले पंप मालिक अपनी जरूरत, स्टोरेज क्षमता और संभावित मांग के हिसाब से अधिक स्टॉक मंगवा सकते थे, लेकिन अब सप्लाई सीमित पैटर्न पर होने से पंप संचालकों के पास अतिरिक्त स्टॉक रखने की गुंजाइश कम हो गई है।
पंप मालिकों का कहना है कि तेल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जितनी बिक्री पहले हो रही थी, लगभग उतनी अब भी हो रही है लेकिन अफवाहों और डर की वजह से लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवा रहे हैं। इसी वजह से पंपों पर दबाव बढ़ रहा है और अनावश्यक भीड़ की स्थिति बन रही है। यानी बाजार में घबराहट ने वास्तविक सप्लाई से ज्यादा मनोवैज्ञानिक दबाव पैदा कर दिया है।
देहात क्षेत्रों में ज्यादा असर, सप्लाई घटने से बढ़ी परेशानी
शहर के मुकाबले ग्रामीण और देहात क्षेत्रों में स्थिति थोड़ी अधिक संवेदनशील बताई जा रही है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ पंप संचालकों ने बताया कि देहात के पेट्रोल पंपों पर सप्लाई अपेक्षाकृत कम कर दी गई है, जिसकी वजह से वहां ईंधन उपलब्धता को लेकर परेशानी बढ़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अक्सर खेती, परिवहन, जनरेटर, सिंचाई और छोटे व्यवसायों के लिए डीजल-पेट्रोल पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। ऐसे में अगर वहां सप्लाई बाधित होती है, तो उसका असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खेती-किसानी, मंडी परिवहन और छोटे व्यापार तक पहुंचता है।
महंगाई का सीधा असर आम आदमी पर
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चलाने की लागत तक सीमित नहीं होता। ईंधन महंगा होने का मतलब है माल ढुलाई महंगी होगी। सब्जी, दूध और किराना की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। ऑटो, टैक्सी और निजी परिवहन का खर्च बढ़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और सिंचाई की लागत प्रभावित होगी। रोजमर्रा का घरेलू बजट और बिगड़ेगा। यानी ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी महंगाई की चेन रिएक्शन पैदा कर सकती है।
घबराहट नहीं, समझदारी जरूरी
विशेषज्ञों और पंप संचालकों की मानें तो इस समय सबसे जरूरी है कि लोग अफवाहों से बचें और जरूरत से ज्यादा ईंधन स्टॉक करने की मानसिकता न अपनाएं। क्योंकि ऐसी स्थिति में कृत्रिम दबाव पैदा होता है और जिन इलाकों में सप्लाई सामान्य है, वहां भी अस्थायी किल्लत का माहौल बन सकता है। अगर सरकारी तेल कंपनियां भी आने वाले दिनों में दाम बढ़ाती हैं, तो आगरा समेत पूरे क्षेत्र में महंगाई का असर और तेज महसूस किया जा सकता है।