वृंदावन और मथुरा में यमुना के प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर एनजीटी ने जारी किए नोटिस; नदी तट पर अवैध निर्माणों पर भी संज्ञान

वृंदावन। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जल संसाधन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, मथुरा-वृंदावन नगर निगम, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण, ब्रज तीर्थ विकास परिषद, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस एक याचिका पर जारी किए गए हैं, जिसमें वृंदावन और मथुरा जैसे पवित्र नगरों में यमुना नदी में लगातार और अनियंत्रित रूप से सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवाह तथा नदी के बाढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध और अनधिकृत निर्माणों का मुद्दा उठाया गया है।

Apr 22, 2026 - 19:29
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वृंदावन और मथुरा में यमुना के प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर एनजीटी ने जारी किए नोटिस; नदी तट पर अवैध निर्माणों पर भी संज्ञान

ब्रज वृन्दावन देवालय समिति के संयुक्त सचिव याचिकाकर्ता श्री विजय किशोर गोस्वामी, जो श्री राधा मदन मोहन मंदिर के प्रधान सेवायत हैं, ने 17 दिसम्बर 2021 के आदेश के अनुपालन के लिए निष्पादन याचिका दायर की। इस आदेश में मुख्य सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों को सीवेज उपचार व्यवस्था को सुधारने, अतिक्रमण हटाने और नदी की सुरक्षा के लिए वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए गए थे।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ, शुभम उपाध्याय और अनुकृति बाजपेयी पेश हुए।

विजय किशोर गोस्वामी की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने न्यायालय को बताया कि यमुना नदी अब भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) डिज़ाइनेटेड बेस्ट यूज़ क्राइटेरिया के अनुसार श्रेणी ‘D’ में बनी हुई है, जिसका अर्थ है कि नदी का जल स्नान, पेय या घरेलू उपयोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त है।

उन्होंने आगे कहा, “न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नदी के किनारे अवैध निर्माण लगातार हो रहे हैं। प्रतिदिन हजारों लोग यमुना नदी पर जाते हैं और उनमें से कई लोग इसी प्रदूषित जल से आचमन भी करते हैं।” उन्होंने इस समस्या को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक है।

SP_Singh AURGURU Editor