नीलगाय की हत्या का मामलाः सब कुछ शीशे की तरह साफ होने के बावजूद पुलिस क्यों सॊफ्ट बनी रही
आगरा। सावन के दूसरे सोमवार की पूर्व संध्या पर जब आगरा में लाखों शिवभक्त बम-बम भोले की गूंज के साथ परिक्रमा कर रहे थे, उसी समय सैंया थाना क्षेत्र में एक नीलगाय को गोलियों से भून डाला गया। घटना का सबसे भयावह पक्ष यह नहीं कि निरीह वन्यजीव की निर्ममता से हत्या हुई, बल्कि यह है कि घटना की सूचना देने वालों को पुलिस ने ही हवालात में डाल दिया, जबकि ग्रामीणों द्वारा पकड़ी गई मुख्य आरोपी महिला को थाने से रिहा कर दिया गया। इससे साफ है कि पूरा मामला शिकारी गिरोह बनाम ग्रामीण चेतना न होकर पुलिस की कार्यशैली और साठगांठ पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
-ग्रामीणों द्वारा मौके से पकड़ी महिला शिकारी को थाने से क्यों जाने दिया गया?
-जिन्होंने पुलिस को सूचना देकर कर्तव्य निभाया, उन्हें ही थाने में क्यों बैठाया?
शिकारियों के तांडव से कांप उठा गांव
थाना सैंया के भूतपुरा ग्राम, जो आगरा-ग्वालियर राजमार्ग के समीप है, में रविवार शाम को पांच पुरुष और एक महिला शिकारी दल ने नीलगाय को गोलियों से छलनी कर दिया। ग्रामीणों ने जब गोलियों की आवाज सुनी, तो तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। गांव वालों को आते देख पांचों पुरुष शिकारी तो भागने में सफल रहे, लेकिन एक महिला शिकारी को धारदार हथियारों से भरे बोरे और बाइक के साथ ग्रामीणों ने पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया।
शव खेत में, टुकड़े नहर में, जेसीबी से दफन!
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने नीलगाय का शव खेत में ही छोड़ दिया। इसके कुछ समय बाद मौके से भागे शिकारी फिर से वहां पहुंचते हैं और मरी पड़ी नीलगाय के शव के टुकड़े कर पास की नहर में डाल देते हैं। इससे यह साफ हो गया कि या तो पुलिस की उपस्थिति में शव के साथ छेड़छाड़ हुई या फिर पुलिस के स्तर से जिम्मेदारी निभाने में चूक हुई। ग्रामीणों का तो यहां तक कहना है कि पुलिस ने ही शव को कटवा कर नहर में फिंकवा दिया, जिसे बाद में नहर से निकलवाकर जेसीबी बुलवाकर आनन-फानन में दफना दिया गया। बिना किसी पोस्टमार्टम, पंचनामा या वन विभाग की उपस्थिति के।
जांच की बजाय दबाव: सूचना देने वाले ग्रामीण थाने में बंद
इस मामले में सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि घटना की सूचना देने वाले दो ग्रामीणों को पुलिस ने रात भर थाने में बैठाए रखा। वहीं ग्रामीणों द्वारा मौके से गिरफ्तार की गई महिला शिकारी, जिसने पुलिस के सामने अपने पांच साथियों के नाम बताए, उसे थाने से ही छोड़ दिया गया। यह वही महिला थी जिसकी बाइक पर जानवरों को काटने के हथियार भरे बोरे के साथ ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा था।
शिकारी गिरोह की जड़ें जंगल से जुड़ी, पुलिस की पकड़ ढीली
गिरफ्तार महिला के बयान के अनुसार, गिरोह के अन्य सदस्य इरादतनगर क्षेत्र के खारी नदी के जंगलों में बसे मोवीया जाति के लोग हैं। पुलिस ने दबिश देकर सधूपुरा गांव के पास से एक और व्यक्ति को पकड़ा, परंतु मुख्य आरोपी अभी भी फरार हैं। सूचना मिलने के बाद वन विभाग भी सक्रिय हुआ। वन विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वन विभाग के सक्रिय न होने से पहले तक तो पुलिस आरोपियों का धारा 151 चालान करने की बातें कर रही थी।
गौ रक्षा से जुड़े संगठन ने जताया आक्रोश
विश्व हिंदू परिषद के गोरक्षा प्रमुख अशोक त्यागी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने घटना की जानकारी रविवार रात को ही डीसीपी अतुल शर्मा और एसीपी सुकन्या शर्मा को दे दी थी। उनके अनुसार, घटना के चश्मदीद गवाहों और ग्रामीण कार्यकर्ताओं- कान्हा बजरंगी, सोनू सविता, रोहित राठौर, भोपाली, भूरा गुर्जर आदि ने थाना सैंया पुलिस के समक्ष पूरी जानकारी दी थी, फिर भी मुख्य आरोपियों को पकड़ने में कोताही की गई।
अब उठते हैं सवाल, जिन्हें जवाब चाहिए...
पुलिस की जानकारी में होने के बाद भी नीलगाय के शव के साथ छेड़छाड़ कैसे हुई? सूचना देने वालों को थाने में क्यों बैठाया गया? आरोपी महिला को किस आधार पर छोड़ा गया? वन्य जीव हत्या के बावजूद उचित वन्य अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों नहीं हुई? पुलिस ने नीलगाय के शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया। क्या पुलिस की शिकारी गिरोह से सांठगांठ है?