आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से निसार सेटेलाइट को किया गया लांच
श्रीहरिकोटा। भारत ने एक बार फिर अंतरिक्ष में इतिहास रच दिया है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से जीएसएलवी- एफ16 पर नासा-इसरो निसार सैटेलाइट को लॉन्च किया गया। यह इसरो और नासा का एक संयुक्त प्रोजेक्ट है। इसका उद्देश्य पृथ्वी की जटिल प्रक्रियाओं को समझना है। जैसे कि पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव, बर्फ की चादरों का पिघलना, प्राकृतिक आपदाएं, समुद्र के स्तर में वृद्धि और भूजल की समस्याएं।
निसार में लगा रडार अंतरिक्ष में अपनी तरह का पहला रडार है। यह पृथ्वी की सतह में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को भी माप सकता है, जो एक सेंटीमीटर तक के हो सकते हैं। यह रडार पूरी पृथ्वी का नक्शा तैयार करेगा। इस मिशन का लक्ष्य है पृथ्वी की सतह में होने वाले बदलावों को बारीकी से देखना। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि हमारी पृथ्वी कैसे बदल रही है।
इसरो और नासा का यह साझा प्रयास पृथ्वी के बारे में हमारी समझ को और बेहतर बनाएगा। निसार कक्षा में स्थापित हो चुका है, इसरो और नासा के वैज्ञानिकों ने खुशी जताई। हर 12 दिन में धरती के चक्कर लगाएगा यह सैटेलाइट। दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट है जो दो तरह के रडार से लैस है। यह जंगलों के ऊपर से जमीन के अंदर की हलचल भी देख सकता है।
निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार) एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट है। यह पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जिसमें धरती को देखने के लिए दो अलग-अलग फ्रीक्वेंसी वाले रडार नासा का एल-बैंड और इसरो का एस-बैंड का इस्तेमाल किया जाएगा। इन रडार को नासा की 12 मीटर के एंटीना से चलाया जाएगा, जो इसरो के आई-3के सैटेलाइट प्लेटफॉर्म पर लगाई गई है। 2,392 किलोग्राम वजन वाले इस उपग्रह को भारत के जीएसएलवी-एफ16 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में ले जाया जाएगा।