श्वानों को न खाना, न इलाज और  न रिकॉर्ड: एबीसी सेंटर पर मेयर को आई घपले की बू

आगरा। नगर निगम आगरा द्वारा संचालित एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) अभियान की हकीकत उस समय उजागर हुई जब महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने गुरुवार को जलेसर रोड स्थित एबीसी सेंटर पर औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मिली घोर अव्यवस्थाओं को देखते हुए महापौर ने बड़े घोटाले की आशंका जताई है।

Jun 5, 2025 - 19:15
Jun 5, 2025 - 19:16
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श्वानों को  न खाना, न इलाज और  न रिकॉर्ड: एबीसी सेंटर पर मेयर को आई घपले की बू
जलेसर रोड स्थित एबीसी सेंटर का निरीक्षण करते महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह।

-श्वानों की दुर्दशा पर भड़कीं महापौर: सवाल- आगरा में ऐसे कैसे चलेगा एनिमल बर्थ कंट्रोल?

बदबू, भूख और बंध्याकरण के फर्जी आंकड़े

मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने पाया कि करीब 1.85 करोड़ रुपये की लागत से बने इस डॉग केयर सेंटर की हालत ऐसी थी कि अंदर घुसना भी मुश्किल हो रहा था। कई श्वान गंभीर अवस्था में पिंजड़ों में बंद थे और उन्हें भोजन तक नहीं दिया गया था। जब महापौर ने भोजन स्टॉक की जांच की तो वह बेहद नाकाफी मिला।

वहां मौजूद कर्मियों से पूछताछ में सामने आया कि रोजाना 65 श्वानों के बंध्याकरण का दावा किया जाता है, जबकि उस समय सेंटर में इतने श्वान मौजूद ही नहीं थे। एक कर्मी ने महापौर को बताया कि आज 26 श्वान पकड़कर लाए गए हैं। महापौर ने जब रजिस्टर चेक किए तो उनमें कई एंट्री अधूरी थीं, जिससे रिकॉर्ड में हेराफेरी की पुष्टि होती है।

महापौर ने जताई घपले की आशंका

महापौर ने सख्त लहजे में कहा कि यह मामला सिर्फ श्वानों के साथ अमानवीय व्यवहार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर की स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने शंका जताई कि श्वानों के भोजन का पैसा पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अजय कुमार और उनकी टीम द्वारा गबन किया जा रहा है और संभवतः मृत श्वानों को सेंटर में ही दफना दिया जा रहा है।

महापौर ने साफ कहा कि वह इस पूरे प्रकरण की ऊच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

अभियान की साख पर सवाल

एबीसी अभियान का उद्देश्य श्वानों की जनसंख्या नियंत्रण और एंटी-रेबीज के माध्यम से जनस्वास्थ्य की रक्षा करना है। लेकिन जिस तरह से मेयर के निरीक्षण के दौरान सेंटर में अनियमितता और लापरवाही सामने आई है, उससे इस अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। यह न सिर्फ निराश्रित पशुओं के साथ क्रूरता है बल्कि 30 लाख से अधिक आगरा निवासियों की सुरक्षा से खिलवाड़ भी है।

SP_Singh AURGURU Editor