अब गाय-भैंस भी बनेंगी सरोगेट मदर! बरेली में पहली बार एक साथ 7 टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपण की सफलता
बरेली स्थित आईवीआरआई संस्थान ने पहली बार छह गायों और एक भैंस में लैब में तैयार किए गए सात टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपित किए हैं। ये सभी पशु अब सरोगेट मदर बनेंगे। ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से विकसित यह प्रयोग पशुओं की उन्नत नस्ल तैयार करने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
-आरके सिंह-
बरेली। यहां स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। यहां पहली बार एक साथ सात टेस्ट ट्यूब भ्रूणों का प्रत्यारोपण छह गायों और एक भैंस में सफलतापूर्वक किया गया है। इन सभी को ‘सरोगेट मदर’ के रूप में तैयार किया गया है।
गर्भधारण का इंतजार, अब लेबोरेटरी में बनेंगे उन्नत बछड़े
आवीआरआई के वैज्ञानिकों के अनुसार, इन सभी सरोगेट पशुओं से सात से नौ महीने के भीतर टेस्ट ट्यूब बेबी यानी प्रयोगशाला में विकसित बछड़े और बछिया जन्म लेंगे। इस प्रयोग से उन्नत नस्ल के पशु तैयार होंगे, जो न केवल अधिक दूध देंगे बल्कि किसानों की आय भी बढ़ाएंगे।
पहली बार एक साथ सात भ्रूण, देश में नया रिकॉर्ड
पशु पुनरुत्पादन विभाग के डॉ. ब्रजेश कुमार ने बताया कि देश में यह पहली बार हुआ है जब एक साथ सात भ्रूणों को सरोगेट पशुओं में प्रत्यारोपित किया गया। इसमें पांच साहीवाल, एक थारपरकर नस्ल की गाय और एक मुर्रा नस्ल की भैंस शामिल हैं।
ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन
2018 में शुरू हुए इस शोध को 2022 में ओवम पिकअप (ओपीयू) और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक से नई दिशा मिली। अब परंपरागत तरीके से एक गर्भधारण के बजाय, एक गाय से साल में 20 और एक भैंस से 10 भ्रूण तक विकसित किए जा सकते हैं।
किसानों की बदलेगी तक़दीर, नस्ल सुधार से दुग्ध क्रांति की उम्मीद
आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के अनुसार, इस तकनीक से बनने वाले बछड़े बेहतर नस्ल के होंगे, जिनमें दूध देने की क्षमता अधिक होगी। इससे दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सीधा लाभ मिलेगा।
भविष्य में टेस्ट ट्यूब बछड़े होंगे आम
डॉ. ब्रजेश कुमार ने भरोसा जताया कि यह तकनीक पशुपालन के क्षेत्र में वैसा ही परिवर्तन लाएगी जैसा इंसानी स्वास्थ्य में टेस्ट ट्यूब बेबी क्रांति लाया था। आने वाले वर्षों में ये प्रयोग आम बात हो जाएगी और देश दुग्ध उत्पादन में नया इतिहास रचेगा।
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