अब राम दरबार में विराजेंगे राजा रामः जन्मभूमि परिसर में आरंभ हुआ देव प्रतिष्ठा का पुण्य पर्व
अयोध्या में एक बार फिर देव प्रतिष्ठा का उत्सव चल रहा है। राम दरबार के साथ ही परकोटे के अंदर बनाये गये अन्य मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और सनातन संस्कृति का उत्सव है, जहां हर शिला, हर मंत्र, और हर आस्था राम में समर्पित है।
सरयू तट से जल कलश लाती श्रद्धालु महिलाएं। भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम।
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में एक बार फिर वैदिक मंत्रों की गूंज और श्रद्धा की लहर दौड़ पड़ी है। तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ सोमवार प्रातः 6:30 बजे से प्रारंभ हो चुका है, जो आज भी जारी है। यह आयोजन मंदिर परिसर के आठ नवनिर्मित देवालयों में भगवानों की मूर्तियों की स्थापना के लिए हो रहा है। मुख्य प्रतिष्ठा समारोह 5 जून को अभिजीत मुहूर्त में संपन्न होगा, जब राम दरबार में श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी की प्रतिष्ठा की जाएगी।
संगमरमर की प्रतिमाओं में बसेंगी भक्ति और शक्ति
राम मंदिर के प्रथम तल पर भव्य राम दरबार की स्थापना की जा रही है। श्रीराम व माता सीता की मूर्तियां सफेद संगमरमर के दो फुट ऊंचे सिंहासन पर विराजमान होंगी। लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्तियां सामने बैठे हुए रूप में रहेंगी, जबकि भरत और शत्रुघ्न सिंहासन के पीछे खड़े स्वरूप में होंगे। इन सभी मूर्तियों का निर्माण जयपुर, राजस्थान में सफेद संगमरमर से किया गया है, जो शुद्धता और भव्यता का प्रतीक है।
सोने से मढ़ा गया मंदिर का शिखर, साकार हो रहा युगों का स्वप्न
प्राण प्रतिष्ठा से पहले मंदिर के शिखर को शुद्ध सोने से अलंकृत किया गया है, जो रामराज्य के दिव्य वैभव का प्रतीक बनकर आकाश से संवाद करता है। यह शिखर श्रद्धा, भक्ति और भारतीय गौरव का प्रतीक बन गया है।
जल कलश यात्रा में महिलाओं की आस्था का प्रवाह
सोमवार को लगभग 400 महिलाओं ने सरयू तट से पवित्र जल कलश उठाकर मंदिर परिसर तक भव्य यात्रा निकाली। यह जल विग्रहों को स्नान कराने हेतु प्रयोग होगा। यात्रा में मंगल गीतों और शंखध्वनि के साथ महिला शक्ति की आस्था अद्वितीय रूप में प्रकट हुई। आज तीन जून को सुबह से उन सभी मंदिरों में विशेष पूजा पाठ शुरू हो गया है जो राम मंदिर परिसर में ही बनाए गये हैं। कल भी पूजा पाठ का क्रम चलेगा और पांच जून को इन सभी मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा होगी।
श्रीराम जन्मभूमि परिसर में बने हैं ये और मंदिर
श्रीराम जन्मभूमि परिसर में परकोटे के अंदर भगवान शिव, सूर्य, गणेश जी, मां भगवती, मां अन्नपूर्णा के मंदिर में प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इसके अलावा सप्त मंडपम में बने महर्षि वाल्मीकि, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, अहिल्या और शबरी के मंदिर में मूर्तियां स्थापित हो चुकी हैं।
संतों का सान्निध्य, मुख्यमंत्री का आगमन
तीन दिवसीय आयोजन में देशभर से आए 101 विद्वान संत वैदिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं। 5 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो स्वयं गोरखनाथ मठ के महंत हैं, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। विशेष संयोग है कि उसी दिन उनका 53वां जन्मदिवस और विश्व पर्यावरण दिवस भी है।