139वीं जयंती पर आगरा से उठी राजा महेंद्र प्रताप को भारत रत्न दिये जाने की मांग

महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और प्रथम निर्वासित अंतरिम सरकार के राष्ट्रपति रहे राजा महेंद्र प्रताप सिंह की जन्मजयंती पर आगरा में आयोजित विचार गोष्ठी में उनके विराट योगदान का भावपूर्ण स्मरण किया गया। वक्ताओं ने एकस्वर में मांग उठाई कि राष्ट्रहित में उनके अप्रतिम बलिदान को सम्मान देने के लिए राजा महेंद्र प्रताप को भारत रत्न से अलंकृत किया जाए और उनकी जीवनी को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

Dec 1, 2025 - 19:58
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139वीं जयंती पर आगरा से उठी राजा महेंद्र प्रताप को भारत रत्न दिये जाने की मांग
राजा महेंद्र प्रताप सिंह की जन्मजयंती पर आयोजित विचार गोष्ठी में उपस्थित प्रबुद्धजन।

आगरा। महान स्वतंत्रता सेनानी, मुरसान रियासत के पूर्व राजा, महादानी, समाज सुधारक और पूर्व सांसद राजा महेंद्र प्रताप सिंह की जन्मजयंती पर रविवार को मानसिंह पैलेस, लखनपुर शास्त्रीपुरम में एक विशेष विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और राजा साहब के अविस्मरणीय योगदान का स्मरण किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने की तथा संचालन महामंत्री वीरेंद्र सिंह छोकर ने किया। वक्ताओं ने राजा महेंद्र प्रताप के देश की आजादी में योगदान का स्मरण किया और बताया कि कैसे उन्होंने 32 साल विदेशों में रहकर देश की आजादी के लिए समर्थन जुटाया। सन् 1915 में एक दिसम्बर को काबुल (अफगानिस्तान) में भारत की पहली निर्वासित अंतरिम सरकार का गठन किया, जिसमें राजा महेंद्र प्रताप राष्ट्रपति और मौलाना बरकतुल्लाह प्रधानमंत्री बने।

वक्ताओं ने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप ने मथुरा और वृंदावन की अपनी समस्त संपत्ति शिक्षा के लिए दान कर दी। वृंदावन का प्रेम महाविद्यालय व उससे जुड़ी 80 एकड़ भूमि, मथुरा के कई घाट और महल उन्होंने राष्ट्रहित में सरकार को समर्पित कर दिए। यही नहीं, राजा साहब ने ‘संसार संघ’ की परिकल्पना की थी, जिसे आज विश्व संयुक्त राष्ट्र संघ के रूप में जानता है।

कार्यक्रम के आयोजक एवं महानगर युवा जाट महासभा के अध्यक्ष लखन चौधरी ने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप की जीवनी को स्कूल और विश्वविद्यालय की पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया जाना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी उनके संघर्ष और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा ले सके।

विचार व्यक्त करने वालों में जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर, लखन चौधरी, सुरेंद्र सिंह, मानसिंह (पूर्व प्रमुख), राधेश्याम मुखिया, चौधरी गोपीचंद, प्रदेश मंत्री डॉ. रूपेश चौधरी, भूपेंद्र सिंह राणा, जयप्रकाश चाहर, गजेंद्र सिंह नरवार, सुरेंद्र चौधरी, निर्मल चाहर, सुजाता सिंह तालान, निशा चौधरी, वंदना सिंह, सरोज चाहर, राम गोपाल चाहर, युवा कवि हिरेन्द्र सिंह नरवार, वरिष्ठ पत्रकार अशोक चौधरी, चौ. नवल सिंह, चौ. गुलबीर, चौ. ओमप्रकाश सिंह, रिटायर्ड फ्लाइंग लेफ्टिनेंट नानकचंद वर्मा, गोविंद चौधरी, निपुण चौधरी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

राजा महेंद्र प्रताप को भारत रत्न देने की एक स्वर से मांग

राजा महेंद्र प्रताप की जयंती पर वरिष्ठ नागरिक सेवा संगठन के कार्यक्रम में मौजूद अतिथिगण।

भारतीय वरिष्ठ नागरिक सेवा संगठन द्वारा राजा महेंद्र प्रताप की 139वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता कुंवर शैलराज सिंह ने इस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राजा महेंद्र प्रताप विश्व बंधुत्व के महानायक, स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद, पत्रकार, लेखक, क्रांतिकारी और समाजसेवी थे। आपने ही एक दिसम्बर 1915 को काबुल में भारत की पहली अंतरिम सरकार का गठन किया, जिसके वह राष्ट्रपति बने थे।

समारोह में वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान भी किया गया। मनहर शर्मा, चौधरी उदयभान सिंह, सुगम आनंद, भीमसेन चाहर, केएल चाहर, आचार्य यादराम सिंह, सुरेंद्र सिंह सजग, पुरुषोत्तम फौजदार, संजय खिरवार, सतीश खिरवार, सुनीता सिंह, अजीत सिंह चाहर, उदयवीर सिंह चाहर, प्रताप सिंह चाहर आदि ने एक स्वर से राजा महेंद्र प्रताप को भारत रत्न दिए जाने की मांग की।

SP_Singh AURGURU Editor