बाप रे! ऐसा ब्रेनवॊशः दोनों बहनों के दिल में बसा इस्लाम, मां-बाप के आंसुओं पर भी टस से मस नहीं
आगरा। धर्मांतरण गिरोह के शिकंजे से छूट चुकी दो बहनों की मानसिक स्थिति देखकर पुलिस और परिवार दोनों सकते में हैं। चार दिन पहले आगरा पुलिस ने इन दोनों बहनों को धर्मांतरण गैंग के चंगुल से छुड़ाया था, लेकिन इनका मन आज भी वहीं अटका है जहां से उन्हें वापस लाया गया। माता-पिता के आंसू भी इन दोनों बहनों को टस से मस नहीं कर पा रहे।
इन बहनों का इस्लाम को लेकर ऐसा ब्रेनवॉश किया गया है कि अब वे सनातन धर्म को पिछड़ा और इस्लाम को इकलौता सच मान रही हैं। जब पुलिस या परिवार उन्हें उनके मूल धर्म के बारे में समझाने की कोशिश करता है, तो वे मुस्लिम रीति-नीति की पैरवी में दलीलें देने लगती हैं।
मां-बाप को रोते देख भी बेटियों का दिल नहीं पिघला
दोनों बहनों को पुलिस ने मुक्त करा लिया है, लेकिन ये अभी भी पुलिस अभिरक्षा में ही हैं। पुलिस के अलावा केवल माता-पिता को उनसे मिलने की अनुमति है। जिस दिन से दोनों बहनें लौटी हैं, माता-माता उनसे मिलने हर रोज पहुंच रहे हैं। माता-पिता को खुशी थी कि उनकी बेटियां मुक्त हो गई हैं। उम्मीद थी कि अपनी बच्चियों को देखकर राहत महसूस करेंगे, लेकिन नज़ारा उल्टा था। दोनों बहनें पुलिस ही नहीं, माता-पिता के सामने भी इस्लाम के पक्ष में बोलती हैं। माता-पिता ने जब अपनी बेटियों से घर चलने को कहा था तो उन्होंने एक ऐसी शर्त रख दी कि पुलिस का भी दिमाग घूम गया। दोनों बहनें कहती हैं कि पुलिस गिरफ्त में आए लोग निर्दोष हैं।
कल बेटियों से मुलाकात के समय माता-पिता की आंखों से आंसू बहते रहे, मगर बहनों के चेहरे पर कोई शिकन नहीं आई।
धर्मांतरण के आरोपियों की रिहाई चाहती हैं दोनों बहनें
पुलिस के सामने दोनों बहनों ने साफ कहा कि वे घर तभी जाएंगी जब गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा किया जाएगा। यानी जिन्होंने उनका धर्म बदलवाया, वे उनके लिए आज भी अपने हैं और जिन्होंने उन्हें जन्म दिया, उनके आंसुओं की कोई कीमत नहीं रही। दोनों बहनें जिन्हें रिहा कराना चाहती हैं, ये वही लोग हैं जिन्हें पुलिस ने एक संगठित धर्मांतरण रैकेट का हिस्सा बताते हुए गिरफ्तार किया है।
पुलिस करा रही लगातार काउंसलिंग
धर्मांतरण की इस मानसिक गिरफ़्त से बाहर निकालने के लिए पुलिस दोनों बहनों की लगातार काउंसलिंग करवा रही है। उन्हें यह समझाने की कोशिश हो रही है कि वे एक सुनियोजित साजिश का शिकार बनी हैं, जहां धर्मांतरण के पीछे सामाजिक या आध्यात्मिक नहीं, आर्थिक एजेंडा छिपा होता है।
पीयूष उर्फ अली की आंखें खुलीं, मां की बातें याद आ रहीं
इस केस में गिरफ्तार अली उर्फ पीयूष सिंह पंवार अब खुद को भटका हुआ नौजवान मानने लगा है। उसने पुलिस को बताया कि कैसे धर्मांतरण के दौरान उसे भी बताया गया कि इस्लाम ही सच्चा रास्ता है, बाकी सब अधर्म है।
अब वह अपनी मां की याद में भावुक हो उठता है, जिसने धर्म बदलते समय बहुतेरा समझाया था, उसने मां की बात नहीं सुनी थी। पीयूष अब जांच में सहयोग देने को तैयार है और पुलिस से अनुरोध कर रहा है कि उसे जेल न भेजा जाए।
ब्रेनवॉश की गहराई: भावनात्मक हथियार, सामाजिक अलगाव और नफरत का बीजारोपण
यह पूरा मामला दर्शाता है कि धर्मांतरण गिरोह किस तरह भावनात्मक और मानसिक स्तर पर युवाओं को तोड़ता है। पहले उन्हें असुरक्षित और हीनता का बोध कराया जाता है। फिर धार्मिक ग्रंथों की चयनित व्याख्याओं से भ्रमित किया जाता है। मूल धर्म के प्रति नफरत और नए के प्रति समर्पण भाव पैदा किया जाता है। और अंत में गिरोह के प्रति निष्ठा का भाव जाग्रत करना।
यही उनकी रणनीति है, जो पूरी तरह ब्रेनवॉश की साजिश है।
क्या बहनें लौटेंगी सामान्य जीवन में?
अब सवाल यही है कि क्या आगरा की दोनं बहनें कभी मानसिक रूप से पूरी तरह लौट पाएंगी? क्या परिवार अपनी बेटियों को फिर से उसी रूप में देख सकेगा जैसा वे थीं? और क्या इस साजिश के पीछे के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हो पाएगा?
फिलहाल, आगरा पुलिस सिर्फ अपराधियों को पकड़ने तक ही सीमित नहीं है बल्कि पीड़ितों की सोच को वापस लाने के प्रयासों में भी जुटी है। अदालती कार्यवाही को फेस करने के लिए भी पुलिस के लिए ऐसा करना जरूरी है।