पृथ्वी दिवस पर संस्कार भारती ने किया भू अलंकरण सज्जा का आयोजन
आगरा। पृथ्वी हमारे जीवन और अस्तित्व का प्राथमिक और मूल आधार है। अतः हिंदू मान्यताओं में पृथ्वी को माता के रूप में स्वीकार किया गया है।
वायु, अग्नि, जल तथा आकाश का अस्तित्व भी पृथ्वी के होने से ही है। इसलिए पृथ्वी के महत्व को स्वीकार करने और पृथ्वी का आभार व्यक्त करने के रूप में पृथ्वी का श्रृंगार करने के लिए संस्कार भारती पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल को भू अलंकरण दिवस का आयोजन करती है।
सृजनिका आर्ट गैलरी और स्टूडियो, पुष्पांजलि रोड, दयालबाग पर पृथ्वी दिवस के अवसर पर आयोजित रंगोली सज्जा के अवसर पर संस्कार भारती के प्रांतीय उपाध्यक्ष नंद नंदन गर्ग ने यह विचार व्यक्त किए।
इससे पूर्व दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए संस्कार भारती के महानगर अध्यक्ष आर्किटेक्ट राजीव द्विवेदी ने कहा कि भू अलंकरण के विभिन्न चिन्ह हमारे दैनिक जीवन के महत्वपूर्ण अंग हैं। इन्हीं को संयुक्त रूप से और पृथक रूप से रंगोली सज्जा करके पृथ्वी का आभार करने के साथ-साथ समाज में सृजनता को बढ़ावा देना ही संस्कार भारती का उद्देश्य है।
इस अवसर पर आगरा महानगर महामंत्री ओम स्वरूप गर्ग ने कहा कि समाज में विचारों और संस्कारों का सबसे प्रभावपूर्ण और प्रभावी माध्यम कलाएं हैं। इसलिए संस्कार भारती कलाओं के माध्यम से समाज में संस्कारों के पुनर्स्थापना के लिए कार्य करती है।
राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश लखनऊ की कार्यकारिणी सदस्य, संस्कार भारती आगरा महानगर की दृश्य कला प्रमुख तथा सृजनिका आर्ट गैलरी एवं स्टूडियो की डायरेक्टर डॉक्टर आभा सिंह गुप्ता, बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय की चित्रकला विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर बिन्दु अवस्थी ने भी विचार व्यक्त किए। सुदेश कुमार के नेतृत्व में अंजली कुशवाहा, मानसी अग्रवाल, हिमांशी सिंह, रेशमा भसीन चोपड़ा आदि ने रंगोली सजाई।
इस अवसर पर पद्मश्री योगेन्द्र राज्य पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सरोज भार्गव, डा साधना सिंह, चित्रकला प्रमुख डॉ. एकता श्रीवास्तव, बबीता पाठक, संस्थापक रुद्राक्ष फाउंडेशन, प्रख्यात मधुबनी चित्रकार मीनाक्षी मिश्रा "अंजली", क्रीड़ा भारती के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र मित्तल, योग गुरू अवनीश मनु शर्मा, अंकित शर्मा, साधना भार्गव, इंजीनियर अतुल गुप्ता, लक्ष्मी गुप्ता, मदन लाल अग्रवाल, नीनू गर्ग, अखिल भारतीय ब्राह्मण एसोसियेशन की अध्यक्ष वन्दना तिवारी आदि उपस्थित रहे।