स्वस्थ वृद्धावस्था का एकमात्र सूत्र यही है कि ज़िंदगी और प्रकृति का भरपूर आनंद लीजिए- डॊ. अनिल अग्रवाल
आगरा। वृद्धावस्था को यदि खुशहाल, सक्रिय और जीवनभर स्वस्थ रखना है तो ज़िंदगी और प्रकृति का आनंद लेना सीखना होगा। यह कहना है जेरिएट्रिक सोसाइटी ऒफ इंडिया की कार्यशाला के ब्रांड एम्बेसेडर डॉ. अनिल अग्रवाल का। उन्होंने कहा कि भागदौड़ और केवल पैसा कमाने की होड़ में लोग जीवन की प्राकृतिक खुशियों से दूर हो जाते हैं, जिसका दुष्प्रभाव बढ़ती उम्र में बीमारियों और शारीरिक समस्याओं के रूप में सामने आता है।
अनुशासित दिनचर्या ही असली ताकत
जीएसआई की कार्यशाला में कोसीकलां निवासी 71 वर्षीय डॉ. अनिल ने अपनी दिनचर्या साझा करते हुए बताया कि उनका दिन सुबह 3 बजे योग से शुरू होता है। इसके बाद वे करीब तीन घंटे स्ट्रेचिंग व्यायाम करते हैं और रोज़ाना लगभग 12 किलोमीटर दौड़ लगाते हैं। उन्होंने बताया कि अनुशासन और नियमितता ने ही उन्हें इस उम्र में भी पूर्ण रूप से सक्रिय बनाए रखा है।
समय पर काम, समय पर आराम
50 बेड का अस्पताल संचालित करने वाले डॉ. अनिल ने कहा कि वे शाम 5:30 बजे के बाद ओपीडी में नहीं बैठते और रात 8 बजे तक बिस्तर पर चले जाते हैं। उनका मानना है कि शरीर को जितना काम चाहिए, उतना ही आराम भी आवश्यक है। नींद और दिनचर्या में लापरवाही सीधे स्वास्थ्य पर असर डालती है।
पैसा नहीं, संतुलन जरूरी
डॉ. अनिल अग्रवाल ने कहा कि लोग जीवनभर पैसा कमाने में इतने उलझ जाते हैं कि जिंदगी और प्रकृति को एंजॉय करना भूल जाते हैं। यही असंतुलन आगे चलकर वृद्धावस्था में शारीरिक और मानसिक परेशानियों का कारण बनता है। उन्होंने प्रकृति से जुड़ाव, नियमित व्यायाम और समयबद्ध जीवनशैली को स्वस्थ बुढ़ापे की कुंजी बताया।