विपक्ष को करारा झटका,   सीजेआई ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस खारिज,   भड़के डेरेक ओ'ब्रायन,   बोले- बीजेपी ने बनाया मजाक

193 सांसों दों (लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63) ने जिस महाभियोग प्रस्ताव पर साइन किया था। उसका नोटिस 12 मार्च 2026 को राज्यसभा के सभापति को सौंपा गया था।

Apr 6, 2026 - 21:29
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विपक्ष को करारा झटका,   सीजेआई ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस खारिज,   भड़के डेरेक ओ'ब्रायन,   बोले- बीजेपी ने बनाया मजाक

नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए 63 राज्यसभा सांसदों द्वारा दिए गए नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया2023  है। यह फैसला जजेज इंक्वायरी एक्ट, 1968 की धारा 3 के तहत लिया गया है। 

193 सांसदों (लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63) ने जिस महाभियोग प्रस्ताव पर साइन किया था, उसका नोटिस 12 मार्च 2026 को राज्यसभा सभापति को सौंपा गया था। यह देश की आजादी के बाद किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में पहला ऐसा प्रयास था। 

नोटिस संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों (नियुक्ति, सेवा के नियम तथा  आफिस की शर्ते) कानून, 2023 और  व जजेज  (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 के प्रावधानों के तहत दिया गया था। विपक्षी सांसदों ने इसमें ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण आचरण, मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा में अनियमितताएं और अन्य आरोप लगाए थे।

सभापति ने नोटिस और इससे जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा के बाद इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं है। इससे महाभियोग की प्रक्रिया रुक गई है।

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सात आरोप लगाए हैं। इनमें 'पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण', 'सिद्ध कदाचार', 'चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना' और 'बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करना' जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

विपक्ष ने विशेष रूप से बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण कई मतदाता अपने अधिकार से वंचित रह गए। आरोपों में यह भी कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ राजनीतिक दलों के पक्ष में काम करते हुए पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। सूत्रों के अनुसार, इन दावों के समर्थन में विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का भी हवाला दिया है।