ओटीपी का ‘एंड गेम’ शुरू: साइलेंट ऑथेंटिकेशन से बदलेगी बैंकिंग की दुनिया, बिना कोड डाले ही सुरक्षित होंगे ट्रांजैक्शन

डिजिटल बैंकिंग में बड़ा बदलाव आने वाला है। अब बार-बार ओटीपी डालने की झंझट खत्म होने जा रही है। बैंक और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ तकनीक लागू करने की तैयारी में हैं, जिससे ट्रांजैक्शन अधिक सुरक्षित और तेज हो जाएंगे।

Apr 2, 2026 - 13:40
 0
ओटीपी का ‘एंड गेम’ शुरू: साइलेंट ऑथेंटिकेशन से बदलेगी बैंकिंग की दुनिया, बिना कोड डाले ही सुरक्षित होंगे ट्रांजैक्शन

आगरा। देश में डिजिटल लेन-देन को और सुरक्षित और सहज बनाने के लिए बैंकिंग सेक्टर और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर एक नई तकनीक ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद ग्राहकों को OTP (वन-टाइम पासवर्ड) डालने की जरूरत काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

अब तक ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के दौरान सुरक्षा के लिए ओटीपी एक अहम कड़ी था, लेकिन इसके चलते कई बार देरी, नेटवर्क समस्या और फ्रॉड के मामले भी सामने आते रहे हैं। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए अब ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है।

कैसे काम करेगी नई तकनीक?
इस तकनीक के तहत बैंक का ऐप बैकग्राउंड में ही यह सत्यापित करेगा कि जिस मोबाइल फोन से ट्रांजैक्शन हो रहा है, उसमें लगा सिम कार्ड उसी व्यक्ति का है या नहीं, जो बैंक में रजिस्टर्ड है। यदि सब कुछ सही पाया जाता है, तो ट्रांजैक्शन बिना किसी OTP के स्वतः पूरा हो जाएगा।

यूजर्स को मिलेगा बड़ा फायदा:
इस नई प्रणाली के आने से यूजर्स को बार-बार मैसेज चेक करने या OTP डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पूरा प्रोसेस बिना किसी बाधा के ‘साइलेंटली’ पूरा हो जाएगा, जिससे बैंकिंग अनुभव पहले से कहीं ज्यादा तेज और सुविधाजनक हो जाएगा।

फ्रॉड पर लगेगी लगाम
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक सिम क्लोनिंग और ई-सिम स्वैप जैसे साइबर फ्रॉड के मामलों पर प्रभावी रोक लगाने में मददगार साबित होगी। इससे यूजर्स के पैसे और डेटा दोनों की सुरक्षा मजबूत होगी।

इस बीच व्हाटसएप और टेलीग्राम जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए सिम बाइंडिंग की समय सीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी गई है, जिससे कंपनियों को नई व्यवस्था लागू करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सके।

आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन कहते हैं कि ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ आने वाले समय में डिजिटल बैंकिंग का नया मानक बन सकता है। इससे न केवल ट्रांजैक्शन की गति बढ़ेगी, बल्कि सुरक्षा का स्तर भी कई गुना बेहतर होगा।

Top of Form

Bottom of Form

SP_Singh AURGURU Editor