कोर्ट में ड्रामा: पति की हत्या में उम्र कैद की सजा होने पर प्रियंका ने आदेश पर नहीं किए हस्ताक्षर

आगरा। स्थानीय अदालत में बुधवार को बैंक मैनेजर सचिन उपाध्याय हत्याकांड के दौरान उस वक्त तनावपूर्ण माहौल बन गया जब अदालत ने सज़ा सुनाने के बाद अभियुक्त प्रियंका रावत ने न्यायिक आदेश पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया। इस पर जज ने सख़्त रुख अपनाते हुए कहा कि कोई बात नहीं, हस्ताक्षर नहीं करने हैं तो मत करो, भेज दो सबको जेल।  कोर्ट रूम में यह संवाद सुनकर माहौल कुछ क्षणों के लिए स्तब्ध हो गया।

Oct 15, 2025 - 20:10
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कोर्ट में ड्रामा: पति की हत्या में उम्र कैद की सजा होने पर प्रियंका ने आदेश पर नहीं किए हस्ताक्षर
प्रियंका रावत की फाइल फोटो।

बहुचर्चित बैंक मैनेजर सचिन उपाध्याय हत्या कांड में मंगलवार को एडीजे–17 नितिन कुमार ठाकुर की अदालत ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बिजेंद्र रावत को सबूत नष्ट करने के आरोप में सात वर्ष कैद और उनकी पुत्री प्रियंका उर्फ मोना व पुत्र कृष्णा रावत को हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी।

फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत में मृतक की पत्नी भी मौजूद थीं। जैसे ही न्यायाधीश ने तीनों आरोपितों को दोषी करार देकर सज़ा सुनाई, कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया। जब आदेश पर अभियुक्तों के हस्ताक्षर करवाए जा रहे थे, तभी प्रियंका रावत ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।

अदालत ने उसे समझाने का प्रयास किया, यहां तक कि उसके पिता और सह-अभियुक्त बिजेंद्र रावत ने भी बेटी को कहा कि हस्ताक्षर कर दो, लेकिन प्रियंका अपने फैसले पर अड़ी रही। इस पर न्यायाधीश नितिन कुमार ठाकुर ने सख़्त लहजे में कहा- कोई बात नहीं, हस्ताक्षर नहीं करना चाहती तो मत करो, भेज दो सबको जेल।

इसके बाद अदालत ने तीनों दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेजने का आदेश दे दिया। कोर्ट से बाहर आते ही यह वाकया पूरे परिसर में चर्चा का विषय बन गया।

SP_Singh AURGURU Editor