वर्कशाप के लिए आए 369 करोड़ में से 260 खर्च, सदन को भनक तक न लगी, जांच के आदेश
आगरा। आगरा नगर निगम सदन में शुक्रवार को एक बार फिर भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर जहां पार्षद आक्रामक दिखे, वहीं अधिकारी निरुत्तर। एमएंडटी वर्कशाप के लिए आए 369 करोड़ में से 260 करोड़ रुपये खर्च हो गए और नगर निगम सदन में इसका कोई जिक्र तक नहीं आया। पार्षदों ने अफसरों से जवाब मांगा कि ये कहां खर्च हो गए तो जवाब नहीं था। मेयर ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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नगर निगम सदन में उठा मुद्दा, सीवर लाइन घोटाले में जल निगम के सहायक अभियंता पर जवाब नहीं बना, नगरायुक्त ने डांटा
जल निगम द्वारा वेस्टर्न जोन में डाली गई सीवर लाइन में हुए बड़े घपले के मामले में जल निगम की ओर से आए एक सहायक अभियंता के पास कोई जवाब नहीं था तो उन्हें सदन से जाने को कह दिया गया। सदन में कई और भी मुद्दे उठे।
शुक्रवार को नगर निगम सदन के पिछले स्थगित अधिवेशन की बैठक हुई। वरिष्ठ पार्षद रवि माथुर ने एक बहुत अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि एमएंडटी वर्कशाप के लिए 369 करोड़ का बजट आया। इसमें से 260 करोड़ रुपये खर्च भी कर लिए गए हैं। 109 करोड़ रुपये अभी तक बचे हुए हैं।
पार्षद माथुर ने जानना चाहा कि पहली बात तो यह कि 260 करोड़ रुपये कहां खर्च हुए हैं, इस बारे में सदन में कोई जानकारी क्यों नहीं दी गई। दूसरी बात यह कि स्वास्थ्य विभाग ट्रैक्टर आदि की कमी का रोना रो रहा है। जब 109 करोड़ रुपये अभी भी बचे हुए हैं तो वाहनों की खरीद क्यों नहीं की जा रही।
369 करोड़ में से 260 करोड़ खर्च भी हो गए और किसी को पता नहीं कि ये कहां और किस मद में खर्च हुए, इस बात को लेकर मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह भी हैरान थीं। उन्होंने नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल से कहा कि इस मामले की गहराई से जांच कर रिपोर्ट सदन के समक्ष रखी जाए।
जल निगम के सहायक अभियंता निरुत्तर
पार्षद रवि माथुर और राकेश जैन ने पिछले सदन में शहर के वेस्टर्न जोन में डाली गई सीवर लाइन में घपले का मामला उजागर किया था। पिछली बैठक में लिए गए निर्णयानुसार इस मामले में जवाब देने के लिए जल निगम के चीफ इंजीनियर को बुलाया गया था, लेकिन चीफ इंजीनियर की जगह सहायक अभियंता निहाल सिंह नगर निगम सदन में पहुंचे।
पार्षदों ने सहायक अभियंता से पूछा कि आपके विभाग ने सीवर लाइन डालने का काम कर रही मनीषा कंस्ट्रक्शन कंपनी का कुछ काम एक ऐसी कंपनी को क्यों सबलेट करा दिया, जो पहले से ही ब्लैकलिस्टेड है।
इस पर सहायक अभियंता निहाल सिंह ने कहा कि वे कुछ दिन पहले ही आगरा आए हैं, इसलिए उन्हें कुछ भी जानकारी नहीं है। सहायक अभियंता के इतना कहते ही पार्षद रवि माथुर, राकेश जैन, शरद चौहान और हेमंत प्रजापति समेत अन्य पार्षद उखड़ गए और कहने लगे कि जब आपको कोई जानकारी ही नहीं है तो यहां आए क्यों हैं।
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने भी जल निगम के इस सहायक अभियंता को फटकार लगाई तथा पूछा कि जब चीफ इंजीनियर को बुलाया गया था तो वे क्यों आए। वह भी तब, जब उन्हें कोई जानकारी ही नहीं है। इसके बाद निहाल सिंह को सदन से जाने के लिए कह दिया गया।
बंदर चालाक हो गए हैं
नगर निगम सदन में एक पार्षद ने एसएन मेडिकल कालेज परिसर में बंदरों द्वारा मरीजों के तीमारदारों पर हमले की घटनाओं की ओर ध्यान दिलाया और इन्हें पकड़ने की मांग की। इस पर नगर निगम के एक अधिकारी की ओर से जवाब दिया गया कि शहर के बंदर बहुत चालाक हो गए हैं। हम उन्हें पकड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे हाथ नहीं आते। इस जवाब पर रवि माथुर ने चुटकी ली, बंदर नहीं, अफसर चालाक हो गए हैं। बैठे बंदरों के फोटो क्लिक कराकर खानापूर्ति कर देते हैं।
स्लाटर हाउस चालू कराएं
पार्षद मोहम्मद सुहेल ने नगर निगम के बंद पड़े स्लाटर हाउस का मुद्दा उठाते हुए इसे जल्द चालू कराने की मांग की। सुहेल का कहना था कि स्लाटर हाउस बंद रहने से नगर निगम को भी करोड़ों का नुकसान हो रहा है। इस पर अफसरों ने विचार की बात कही।
नगर निगम सदन में विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल की मौजूदगी उल्लेखनीय थी। विधायक खंडेलवाल ने भी शहर के कई मुद्दों को उठाकर अधिकारियों का ध्यान उस ओर आकर्षित किया।