पद्मश्री मनोज जोशी ने किया ‘चाणक्य’ महानाट्य का मंचनः राष्ट्रभाव और गौरव से गूंजा ब्रज रज उत्सव
मथुरा। ब्रज रज उत्सव के नौवें दिन सोमवार की संध्या इतिहास, राष्ट्रनीति और भारतीय चिंतन से ओत-प्रोत रही। मंच पर जब पद्मश्री मनोज जोशी ने अपने प्रसिद्ध नाट्य ‘चाणक्य’ महानाट्य की प्रस्तुति आरंभ की, तो पूरा सभागार उनके अद्भुत अभिनय और प्रखर संवादों से मंत्रमुग्ध हो उठा।

यह नाटक भारतीय इतिहास के महान आचार्य चाणक्य के जीवन, उनकी राष्ट्रनीति, समाज सुधार की दृष्टि और भारतीय गौरव की पुनर्स्थापना की कथा को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है। मनोज जोशी के सशक्त संवाद- “राष्ट्र सर्वोपरि है, व्यक्ति नहीं” पर सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
प्रस्तुति के दौरान मंच पर चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य के संवाद, मगध की राजनीति, नंद वंश का अंत और मौर्य साम्राज्य के उदय जैसे ऐतिहासिक दृश्य एक के बाद एक जीवंत होते गए। प्रकाश, ध्वनि और पृष्ठभूमि संगीत के संयोजन ने इस ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति को और भी भव्य रूप दिया।
इससे पूर्व ‘चाणक्य’ महानाट्य का शुभारंभ सिने अभिनेत्री व सांसद हेमा मालिनी, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एस.बी. सिंह, परिषद के सीईओ सूरज पटेल, नगर आयुक्त जग प्रवेश, सीडीओ मनीष मीणा तथा ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अभिनव जे. जैन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर हेमा मालिनी ने मनोज जोशी का सम्मान कर उनकी कला को “भारत की सांस्कृतिक चेतना का दर्पण” बताया।
ब्रज रज उत्सव स्थल, धौली प्याऊ रेलवे ग्राउंड रंग, रोशनी और भक्ति की महक से सराबोर दिखाई दिया। प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य मंच तक भक्ति संगीत की मधुर ध्वनियाँ गूंज रही थीं। मंच पर जहां कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से ब्रज की संस्कृति को सजीव कर रहे थे, वहीं चारों ओर सजे हस्तशिल्प, लोककला, चित्रकला और ब्रज व्यंजन के स्टॉल आगंतुकों को आकर्षित कर रहे थे।
बच्चे झूलों और झांकी प्रदर्शनियों में आनंदित थे, जबकि श्रद्धालु और पर्यटक पारंपरिक वेशभूषा में ब्रज की रज में रमे हुए नजर आए। उत्सव स्थल के मध्य स्थित श्रीकृष्ण–राधा की भव्य झांकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही और लोगों ने यहां स्मृति स्वरूप सेल्फियाँ लीं।
ब्रज रज उत्सव का यह नौवां दिन न केवल मनोरंजन का, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और नीति की जीवंत शिक्षाओं से भरपूर एक प्रेरक अध्याय बन गया।