अमेरिका के सहारे टिका पाकिस्तान, भविष्य अंधकारमय; हिंदू कोई धर्म नहीं बल्कि साझा जीवनशैली है- आगरा में बोले बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान

आगरा। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने पाकिस्तान के भविष्य को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कुछ अंतरराष्ट्रीय ताकतें उसे बचा नहीं रही होतीं, तो पाकिस्तान अब तक टुकड़े-टुकड़े हो चुका होता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जिस राह पर चल रहा है, उसमें उसका भविष्य अंधकारमय ही दिखाई देता है।

Feb 12, 2026 - 18:18
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अमेरिका के सहारे टिका पाकिस्तान, भविष्य अंधकारमय; हिंदू कोई धर्म नहीं बल्कि साझा जीवनशैली है- आगरा में बोले बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान
बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान।

राज्यपाल गुरुवार सुबह आगरा प्रवास के दौरान शहर के गणमान्य नागरिकों के साथ नाश्ते पर आयोजित एक अनौपचारिक संवाद में शामिल हुए। इसी दौरान उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अब तक अमेरिका अपने हितों के लिए इस्तेमाल करता आ रहा है, और यही कारण है कि वह किसी तरह टिका हुआ है। उन्होंने दो टूक कहा, पाकिस्तान तो बहुत पहले ही बिखर चुका होता, लेकिन अमेरिका उसे बचाता रहा है।  

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर पूछे गए सवाल पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदू हैं, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने स्पष्ट किया कि वह तो यह बात बहुत पहले से कहते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विचार नया नहीं है। हिंदू कोई धर्म नहीं है। हमारा मजहब कुछ भी हो सकता है, लेकिन हमारी जीवनशैली एक है। इसलिए सांस्कृतिक अर्थों में हम सभी हिंदू हैं।

उन्होंने इस संदर्भ में सर सैयद अहमद का उल्लेख करते हुए एक ऐतिहासिक प्रसंग सुनाया। राज्यपाल ने बताया कि एक बार आर्य समाज ने सर सैयद के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया था। उस अवसर पर सर सैयद ने पूछा था कि आप मुझे हिंदू क्यों नहीं कहते? उन्होंने कहा था कि वह हिंदुस्तान के नागरिक हैं, यहां की परंपराओं और रीति-रिवाजों को मानते हैं, इसलिए वे भी हिंदू हैं। राज्यपाल ने कहा कि यही भारत की साझा सांस्कृतिक चेतना है।

आगरा की बेड़ई से अलीगढ़ की यादों तक, आत्मीय संवाद

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शहरवासियों से बेहद आत्मीय अंदाज़ में बातचीत की। उन्होंने आगरा की प्रसिद्ध बेड़ई की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि वह हमेशा दिल्ली की बेड़ई को सबसे मशहूर मानते थे, लेकिन आगरा की बेड़ई का स्वाद तो कहीं बेहतर है।

उन्होंने अपने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र जीवन की यादें भी साझा कीं। कहा कि जब भूख लगती थी तो वे शमसाद मार्केट में खाने जाया करते थे। उन्होंने एक पंडित जी के होटल का भी ज़िक्र किया, जहां वे अक्सर खाना खाते थे। एक रोचक प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि एक बार पंडित जी आटा गूंथ रहे थे और उसी दौरान उनका पसीना आटे में गिर गया। मैंने सोचा, भूख लगी है, पसीना गिर गया तो क्या हुआ, जब आटा घी में सिंकेगा तो सब साफ हो जाएगा। यह कहते हुए राज्यपाल खुद भी हंस पड़े और माहौल को हल्का बना दिया।

SP_Singh AURGURU Editor