यमुना के डूब क्षेत्र को स्थायी सुरक्षा घेरा: एनजीटी आदेश पर 5 अक्तूबर से शुरू होगा मुड्डियां लगाने का कार्य

आगरा। उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के दोनों किनारों पर डूब क्षेत्र को चिन्हित करने के बाद अब इस क्षेत्र की रक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर की जा रही है, जो आगरा के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. शरद गुप्ता की जनहित याचिका के बाद सामने आई। एनजीटी के निर्देशानुसार अब यमुना के डूब क्षेत्र की सीमा पर ‘मुड्डियां’ (मार्किंग पिलर) लगाने की कार्यवाही 5 अक्तूबर से शुरू होगी।

Jul 30, 2025 - 18:21
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यमुना के डूब क्षेत्र को स्थायी सुरक्षा घेरा: एनजीटी आदेश पर 5 अक्तूबर से शुरू होगा मुड्डियां लगाने का कार्य
डॊ. शरद गुप्ता, जो यमुना को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

असगरपुर से प्रयागराज तक तय हुईं डूब क्षेत्र की सीमाएं

एनजीटी के स्पष्ट आदेश पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने हरियाणा-यूपी बॉर्डर स्थित असगरपुर (जहां यमुना यूपी में प्रवेश करती है) से लेकर प्रयागराज (जहां यमुना गंगा में मिलती है) तक यमुना के दोनों ओर डूब क्षेत्र की विधिवत पैमाइश और सीमांकन कर लिया है। यह कार्य डॊ. शरद गुप्ता के तीन वर्षों के सतत प्रयासों और कानूनी लड़ाई के बाद संभव हो पाया है।

200 मीटर की दूरी पर लगेंगी 'मुड्डियां', सितंबर में होगा टेंडर

सिंचाई विभाग ने एनजीटी में दाखिल अपने हलफनामे में सूचित किया है कि यह कार्य आगामी 5 अक्तूबर से प्रारंभ किया जाएगा। विभाग सितंबर में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ठेका देगा। जिसमें यह स्पष्ट शर्त रखी गई है कि 5 अक्तूबर से कार्य शुरू करना अनिवार्य होगा। तय योजना के अनुसार, यमुना के दोनों किनारों पर दो ‘मुड्डियों’ के बीच 200 मीटर की दूरी रखी जाएगी।

डॉ. शरद गुप्ता के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

डॉ. शरद गुप्ता पिछले तीन वर्षों से यमुना के डूब क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए कानूनी जंग लड़ रहे हैं। एनजीटी में उनकी याचिका के चलते ही सिंचाई विभाग को मजबूरन कार्य योजना बनानी पड़ी। पहले डूब क्षेत्र का भौगोलिक निर्धारण हुआ और अब उसके चिन्हांकन का कार्य भी आरंभ होने जा रहा है। यह उनके लिए, और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी जीत है।

मुड्डियां लगने के बाद खुलेगा अतिक्रमण का कच्चा चिट्ठा

हालांकि चिन्हांकन और मुड्डियां लगने से यमुना की सुरक्षा मजबूत होगी, लेकिन इससे एक और जटिल कार्य सामने आएगा- अवैध कब्जे हटाने का। फिलहाल तो डूब क्षेत्र के निर्धारण ने कानूनी रूप से स्पष्ट कर दिया है कि नदी की कितनी भूमि डूब क्षेत्र में आती है। लेकिन जब ‘मुड्डियां’ लगेंगी, तब यह भी साफ हो जाएगा कि किस जिले में कहां-कहां अवैध निर्माण या अतिक्रमण हो रखा है।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, अब जोड़ी जाएगी गंगा याचिका से

अवैध कब्जों को लेकर डॉ. शरद गुप्ता हाल ही में सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचे थे। उन्होंने इस आशय की एक याचिका प्रस्तुत की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि गंगा नदी को लेकर ऐसी ही एक याचिका विचाराधीन है, इसलिए यमुना से जुड़ी याचिका को भी उसके साथ जोड़े जाने की पहल की जाए। अब डॊ. गुप्ता इस दिशा में ही काम कर रहे हैं।

यमुना को बचाने की दिशा में निर्णायक मोड़

यमुना नदी के अस्तित्व और पारिस्थितिक संतुलन की दृष्टि से यह कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। डूब क्षेत्र की सुरक्षा और अतिक्रमणों पर लगाम लगाने के लिए ‘मुड्डियों’ का लगना सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की रक्षा की दिशा में निर्णायक कदम है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी, पालन और क्रियान्वयन में अब जन-सहभागिता और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की परीक्षा होगी।

SP_Singh AURGURU Editor