फर्जी साइन से करोड़ों का पीएफ घोटाला: आगरा नगर निगम में तीन साल से चल रहा था ठगी का खेल!
आगरा। नगर निगम आगरा में वर्षों से एक बड़ा घोटाला चुपचाप फल-फूल रहा था। लेकिन अब इसका परदाफाश होते ही हड़कंप मच गया है। मामला कर्मचारियों की प्रोविडेंट फंड (पीएफ) निकासी से जुड़ा है, जिसमें शातिर ठगों ने अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक से करोड़ों की रकम निकाल डाली। अब सवाल ये उठ रहे हैं कि आखिर बैंक ने बिना हस्ताक्षर का मिलान किए इतनी बड़ी रकम कैसे ट्रांसफर कर दी?
-500 कर्मचारियों के खातों में पहुंचा पैसा, ट्रांसफर हो चुके अधिकारियों के नाम से भी हुए हस्ताक्षर, जांच में बैंक की मिलीभगत का संदेह
तीन साल से चल रहा था खेल, किसी को भनक तक नहीं लगी
नगर निगम कर्मचारियों को जरूरत पड़ने पर अपने भविष्य निधि खाते से पैसा निकालने के लिए वित्त विभाग में निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होता है। विभाग सूची बनाकर परिसर स्थित एसबीआई शाखा को भेजता है, और फिर बैंक कर्मचारियों के खातों में राशि भेजता है।
लेकिन इस प्रक्रिया में भारी सेंध लगाई गई। ठगों ने फर्जी सूची तैयार की और उन पर नगर निगम अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर कर डाले। चौंकाने वाली बात यह है कि हस्ताक्षर उन अधिकारियों के नाम से भी किए गए जो वर्षों पहले ही ट्रांसफर हो चुके हैं। कई फाइलों में तो केवल एक अधिकारी के हस्ताक्षर से ही भुगतान हो गया, जबकि नियमानुसार चार अधिकारियों की संयुक्त स्वीकृति जरूरी होती है।
500 कर्मचारियों के खातों में पहुंचा पैसा, जांच शुरू
अब तक सामने आए तथ्यों के अनुसार इस फर्जीवाड़े से करीब 500 कर्मचारियों के खातों में पीएफ की रकम पहुंचाई गई है। मामला सामने आने के बाद नगर निगम के मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी बृजेश कुमार ने इसकी पुष्टि की है और बैंक पर सीधा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बिना बैंक कर्मियों की मिलीभगत के यह धोखाधड़ी संभव नहीं हो सकती।
उन्होंने बताया कि सभी संदिग्ध फाइलों की गहन जांच की जा रही है और बैंक से भी जवाब मांगा गया है। बैंक की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है क्योंकि भुगतान से पहले दस्तावेज़ों की मूल जांच, हस्ताक्षरों का सत्यापन और स्वीकृत प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होता है।
लापरवाही या साजिश?
इस पूरे प्रकरण ने निगम के सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। वर्षों से चल रहे इस घोटाले में न सिर्फ नगर निगम बल्कि बैंक की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब देखना है कि दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है या मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दबा रह जाएगा।