नरसी की भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं आए श्रीकृष्ण, नानी बाई रो मायरो में भक्ति, नृत्य और संगीत का संगम
आगरा। श्री राणी सती महिला मंडल की ओर से आयोजित नानी बाई रो मायरो कथा के दूसरे दिन जीवनी मंडी स्थित खाटूश्याम मंदिर में भगवान की भक्तवत्सलता और प्रेममय स्वरूप का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया गया। वृंदावन से आयी देवी कृष्णप्रिया ने बताया कि सच्ची भक्ति करने वाले भक्तों के लिए भगवान स्वयं अनगिनत रूप धारण करते हैं और हर युग में अपने भक्तों के अनुरूप प्रकट होते हैं।
कथा के माध्यम से दर्शाया गया कि नरसी ने साधु-संगति को अपना जीवन बना लिया। बेटी को भात देने के लिए उनके पास कुछ नहीं था, लेकिन उन्होंने भगवान कृष्ण का स्मरण करते हुए मन ही मन कहा कि प्रभु मेरी लाज आपके हाथ है। अपने 16 अंधे साधुओं के साथ बैलगाड़ी से बेटी के पास जाने पर उन्हें अपमान और उपहास का सामना करना पड़ा। इस पर भगवान कृष्ण स्वयं नरसी के भाई बनकर प्रकट हुए।
कथा में नृत्य नाटिका के माध्यम से नरसी की नारी सखियों को समझाया गया। मुडिया घेरे-घेरे जाते हैं… गाड़ी में बैठा ले रे बाबा..., आदि भजनों पर संजीव झांकी ने शानदार प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर अध्यक्ष संगीता अग्रवाल, वीना मित्तल, मंजू अग्रवाल, डोली संथोलिया, रेनू बंसल, स्वाति दारुका, शीला लोहिया, उषा अग्रवाल, सुनीता मित्तल, रितिका खंडेलवाल, संतोष खेमका, कल्पना, मोना आदि उपस्थित रहीं।