केंद्रीय बजट पर आगरा में सियासी टकराव, भाजपा बोली विकास का रोडमैप, कर्मचारी संगठनों ने जताई नाराज़गी
केंद्रीय बजट को लेकर आगरा में भाजपा नेताओं ने इसे विकास, रोजगार और आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप बताया, जबकि कर्मचारी संगठनों ने पेंशन, वेतन आयोग और असंगठित क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाते हुए बजट को निराशाजनक करार दिया।
आगरा। केंद्रीय बजट के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने बजट को नए भारत की दिशा तय करने वाला दूरदर्शी दस्तावेज बताया, तो दूसरी ओर कर्मचारी संगठनों ने इसे कर्मचारी-शिक्षक वर्ग की अपेक्षाओं पर खरा न उतरने वाला बताते हुए निराशाजनक करार दिया।
भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने बजट को सुलभ और सर्वस्पर्शी बताते हुए कहा कि आयकर कानून में किए गए बदलावों से व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, युवाओं के लिए अवसर और महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत यह बजट भारत के आर्थिक विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
जिलाध्यक्ष प्रशांत पोनिया ने बजट को किसानों के हितों में मजबूत बताते हुए कहा कि इसमें कृषि क्षेत्र को संबल देने के साथ-साथ सेना के बजट में वृद्धि और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों की स्पष्ट झलक मिलती है। उन्होंने इसे नई सदी के भारत की रफ्तार तय करने वाला रोडमैप बताया, जिसमें गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के सशक्तिकरण को केंद्र में रखा गया है।
भाजपा नेता डॉ. यादवेन्द्र शर्मा ने इसे आम जनता का बजट बताते हुए कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, तकनीक और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ प्रस्तुत यह बजट देश को तेज़ी से विकास की राह पर ले जाएगा और वैश्विक मंच पर भारत की नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करेगा।
दूसरी ओर, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी ने बजट को कर्मचारी और शिक्षक वर्ग के लिए निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि बजट में न तो पेंशन व्यवस्था का कोई उल्लेख है और न ही आठवें वेतन आयोग को लेकर कोई स्पष्ट संकेत, जिससे यह माना जा रहा है कि इस वर्ष आठवां वेतन आयोग लागू नहीं होगा।
उन्होंने असंगठित क्षेत्र, मानदेय और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ पेंशन, जो वर्षों से 1000 रुपये पर अटकी है, उसे बढ़ाने और न्यूनतम वेतन में सुधार की मांग को भी नजरअंदाज बताया। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेलवे रियायतें बहाल न होने पर भी नाराज़गी जताई। उनका कहना था कि कर्मचारियों और शिक्षकों की दृष्टि से यह बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका।