पोप फ्रांसिस का निधन: कैथोलिक चर्च के करुणामयी मार्गदर्शक ने वेटिकन में ली अंतिम सांस

वेटिकन सिटी। दुनिया भर के 1.3 अरब से अधिक ईसाइयों को आध्यात्मिक नेतृत्व देने वाले पोप फ्रांसिस का सोमवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने वेटिकन स्थित 'डोमस सान्ता मार्था' निवास में 88 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वेटिकन प्रशासन के मुताबिक, पोप पिछले कई दिनों से डबल निमोनिया से पीड़ित थे और लगभग 38 दिन अस्पताल में भर्ती रहे थे।

Apr 21, 2025 - 14:22
Apr 21, 2025 - 14:23
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पोप फ्रांसिस का निधन: कैथोलिक चर्च के करुणामयी मार्गदर्शक ने वेटिकन में ली अंतिम सांस

चर्च के पहले लैटिन अमेरिकी और जेसुइट पोप

पोप फ्रांसिस का असली नाम जॉर्ज मारियो बर्गोलियो था। उनका जन्म 17 दिसंबर 1936 को अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुआ। 13 मार्च 2013 को उन्होंने पोप का पदभार ग्रहण किया। वह पहले लैटिन अमेरिकी, पहले जेसुइट और पिछले हजार वर्षों में पहले गैर-यूरोपीय पोप बने।

उनकी नियुक्ति कैथोलिक चर्च में नई सोच और करुणा के प्रतीक के रूप में देखी गई। उन्होंने चर्च की पारंपरिक छवि से अलग हटकर सामाजिक न्याय, गरीबों के अधिकार, जलवायु परिवर्तन, आप्रवासी संकट और समलैंगिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखे।

सुधारवादी और मानवीय दृष्टिकोण

पोप फ्रांसिस के कार्यकाल में चर्च में कई साहसिक बदलाव हुए। यौन शोषण के मामलों में ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई। मृत्युदंड के पूर्ण विरोध में वैश्विक स्तर पर आवाज उठाई। समलैंगिक समुदाय को नागरिक अधिकार देने की वकालत की। प्रवासियों के पक्ष में कई देशों से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। पर्यावरण संरक्षण को धर्मिक जिम्मेदारी बताया।

वेटिकन में राजकीय शोक, अंतिम विदाई की तैयारी

वेटिकन ने पोप फ्रांसिस के निधन के बाद राजकीय शोक की घोषणा की है। उनका पार्थिव शरीर सेंट पीटर्स बेसिलिका में दर्शनार्थ रखा जाएगा। पोप के उत्तराधिकारी के चुनाव के लिए जल्द ही कार्डिनल कॉलेज की बैठक बुलाई जाएगी। यह प्रक्रिया ‘कॉन्क्लेव’ कहलाती है, जहां अगला पोप चुना जाएगा।

दुनिया भर से शोक संदेश

पोप फ्रांसिस की मृत्यु पर दुनियाभर से श्रद्धांजलि संदेश आने लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव, अमेरिकी राष्ट्रपति, यूरोपीय यूनियन, भारत समेत कई देशों के नेताओं और प्रमुख धर्मगुरुओं ने उनके योगदान को एक युगांतकारी परिवर्तन की शक्ति बताया। भारत के कैथोलिक चर्च सहित अनेक धार्मिक संगठनों ने शोक जताते हुए उनके कार्यकाल को दयालुता और समावेशिता का प्रतीक बताया।

 

SP_Singh AURGURU Editor