दस्तावेज़ जांच में फंसे प्रोफेसर, केंद्रीय हिंदी संस्थान का मामला पहुंचा थाने तक, प्रो. उमापति पर मुकदमा दर्ज
आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान में प्रोफेसर उमापति पर फर्जी NOC पेश करने का आरोप लगा है। जांच समिति ने 04 अगस्त 2022 की NOC को संदिग्ध बताया, जबकि 05 अगस्त की NOC सही पाई गई। समिति की रिपोर्ट के बाद कुलसचिव की शिकायत पर थाना न्यू आगरा में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
आगरा। आगरा स्थित केंद्रीय हिंदी संस्थान फर्जी एनओसी मामले को लेकर विवादों में घिर गया है। संस्थान के प्रोफेसर उमापति पर फर्जी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) प्रस्तुत करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले की आंतरिक जांच के बाद अब यह प्रकरण पुलिस जांच तक पहुंच गया है।
जानकारी के अनुसार, प्रोफेसर उमापति द्वारा प्रस्तुत की गई 04 अगस्त 2022 की NOC को जांच समिति ने संदिग्ध करार दिया है। समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के दौरान केवल 05 अगस्त 2022 की NOC ही वैध और सही पाई गई, जबकि 04 अगस्त की NOC के प्रारूप, हस्ताक्षर और प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं।
जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद संस्थान के कुलसचिव (अतिरिक्त प्रभार) ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस से संदिग्ध NOC की फॉरेंसिक जांच कराने की औपचारिक मांग की। कुलसचिव की ओर से दी गई लिखित शिकायत के आधार पर थाना न्यू आगरा में प्रोफेसर उमापति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस अब दस्तावेजों की गहन जांच के साथ यह भी पड़ताल कर रही है कि फर्जी NOC प्रस्तुत करने के पीछे किसी प्रकार का लाभ लेने या नियमों को दरकिनार करने की मंशा तो नहीं थी। वहीं, संस्थान स्तर पर भी इस मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है और आगे की विभागीय कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
यह मामला न केवल संस्थान की प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि उच्च शिक्षण संस्थानों में दस्तावेज़ी सत्यापन की प्रक्रिया को भी कटघरे में लाता है।