आगरा के प्रो. लवकुश मिश्रा को शिक्षा व शोध में योगदान के लिए हार्वर्ड–आईएबी का इंटरनेशनल अवॉर्ड

आगरा। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के वरिष्ठतम पर्यटन विशेषज्ञ प्रो. लवकुश मिश्रा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय शिक्षा जगत का नाम रोशन किया है। अमेरिका की इंटरनेशनल अकादमी ऑफ बिजनेस और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने उन्हें इंटरनेशनल एजुकेशन एंड रिसर्च अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें शिक्षा, शोध और वैश्विक अकादमिक विकास में किए गए असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया गया।

Nov 23, 2025 - 21:18
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आगरा के प्रो. लवकुश मिश्रा को शिक्षा व शोध में योगदान के लिए हार्वर्ड–आईएबी का इंटरनेशनल अवॉर्ड
प्रो. लवकुश मिश्रा।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और इंटरनेशनल अकादमी ऑफ बिजनेस (आईएबी) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार- ‘जियो-पॉलिटिक्स, ट्रैवल ऐंड इकॉनॉमिक डेवलपमेंट’—के समापन अवसर पर यह सम्मान ऑनलाइन समारोह में घोषित किया गया। इस संगोष्ठी का संयुक्त आयोजन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका), युओ यूनिवर्सिटी (नाइजीरिया), डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (भारत) और केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश द्वारा किया गया था।

इस वैश्विक मंच पर अफ्रीका, यूरोप, अमेरिका और एशिया के विश्व–स्तरीय शिक्षाविदों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। खास बात यह रही कि पहली बार स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को भी अपने शोध प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। समारोह के अंतरराष्ट्रीय निदेशक तथा हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में सेंटर फॉर ग्लोबल बिजनेस स्टडीज़ के निदेशक प्रो. नरेंद्र के. रुसगी ने बताया कि यह संगोष्ठी वैश्विक अकादमिक समुदाय को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण प्रयास थी।

विश्वभर के छह श्रेष्ठ शिक्षाविदों को इस अवसर पर सम्मानित किया गया, जिनमें भारत से प्रो. लवकुश मिश्रा (आगरा) भी शामिल रहे। उन्हें यह सम्मान पर्यटन शिक्षा, रिसर्च और नवाचार में लंबे समय से निभाई गई अग्रणी भूमिका के लिए दिया गया। इससे पूर्व भी प्रो. मिश्रा अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अकादमिक सलाहकार, संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ) की वैश्विक संगोष्ठी में भारतीय प्रतिनिधि, और दुनिया के कई प्रतिष्ठित अकादमिक संस्थानों के सक्रिय सदस्य हैं। उनकी 21 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और अब तक वे 25 देशों का अकादमिक भ्रमण कर चुके हैं।

प्रो. मिश्रा ने कहा कि भारत की अकादमिक क्षमता को अभी विश्व स्तर पर बहुत अधिक विस्तार की आवश्यकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि काशी का रत्नेश्वर महादेव मंदिर वास्तुकला की दृष्टि से इटली की पीसा की झुकी मीनार से भी उत्कृष्ट है, किंतु अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र में उसका प्रचार नहीं हो पाता, जो भारत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत के पुनर्जागरण का युग है। हमें दुनिया को भारत की विशिष्टता, संस्कृति और ऐतिहासिक वैभव से परिचित कराना होगा, और इसमें शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

SP_Singh AURGURU Editor