राष्ट्र प्रेरणा-स्थल में संजोई गई पं. दीनदयाल की धरोहरें, प्रधानमंत्री मोदी हुए भावुक
लखनऊ। भारतीय राजनीति और विचारधारा के इतिहास में गुरुवार का दिन एक भावनात्मक और प्रतीकात्मक क्षण बन गया, जब पं. दीनदयाल उपाध्याय के प्रपौत्र एवं प्रख्यात न्यायविद् चन्द्रशेखर पण्डित भुवनेश्वर दयाल उपाध्याय पहली बार भाजपा के एक भव्य सरकारी-पार्टी आयोजन में अपने परिजनों के साथ सम्मिलित हुए। मौका था लखनऊ में नवनिर्मित ‘राष्ट्र प्रेरणा-स्थल’ के लोकार्पण का, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल मंच पर मौजूद थे।
पहली बार भाजपा समारोह में शामिल हुए पं. दीनदयाल उपाध्याय के प्रपौत्र
प्रपौत्र चंद्रशेखर ने पं. दीनदयाल की जीवन-धरोहरें योगी सरकार को सौंपीं
लखनऊ। भारतीय राजनीति और विचारधारा के इतिहास में गुरुवार का दिन एक भावनात्मक और प्रतीकात्मक क्षण बन गया, जब पं. दीनदयाल उपाध्याय के प्रपौत्र एवं प्रख्यात न्यायविद् चन्द्रशेखर पण्डित भुवनेश्वर दयाल उपाध्याय पहली बार भाजपा के एक भव्य सरकारी-पार्टी आयोजन में अपने परिजनों के साथ सम्मिलित हुए। मौका था लखनऊ में नवनिर्मित ‘राष्ट्र प्रेरणा-स्थल’ के लोकार्पण का, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल मंच पर मौजूद थे।
सम्मान से दूरी, सादगी का संदेश
चन्द्रशेखर उपाध्याय ने मंच पर बैठने, अभिनंदन या औपचारिक सम्मान से जानबूझकर दूरी बनाए रखी और हजारों कार्यकर्ताओं के बीच बैठकर आयोजन में सहभागिता निभाई। उन्होंने इसे पं. दीनदयाल उपाध्याय की सादगी और जीवन-दर्शन से प्रेरित बताया। उनके साथ उनके परिजन महेंद्र जोशी, रवींद्र जोशी और हिमांशु भी थे।
राष्ट्र प्रेरणा-स्थल: विचार से विरासत तक
नवनिर्मित राष्ट्र प्रेरणा-स्थल परिसर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 65-65 फीट ऊंची भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। साथ ही तीनों महापुरुषों के जीवनकाल में प्रयुक्त रोजमर्रा की वस्तुओं को संग्रहालय स्वरूप में संरक्षित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधिवत रूप से संग्रहालय का उद्घाटन कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया। संग्रहालय में रखी पं. दीनदयाल की वस्तुएं देखकर प्रधानमंत्री भावुक भी नजर आए।
योगी सरकार को सौंपी गई ऐतिहासिक धरोहरें
योगी सरकार के आग्रह पर चन्द्रशेखर उपाध्याय ने अपने परिवार द्वारा वर्षों से संरक्षित पं. दीनदयाल उपाध्याय की अनेक अमूल्य धरोहरें सरकार को सौंपीं। इनमें शामिल हैं पं. दीनदयाल द्वारा प्रयुक्त बर्तन,दो चश्मे, कुल्हड़, सूटकेस, पटिया, परिजनों को नेग में दिए गए सिक्के, मेज-कुर्सी, अलमारी, घड़ी, पेन,पं. दीनदयाल द्वारा अपने पिता व संघ प्रचारक तथा जनसंघ के सबसे कम आयु के मंत्री रहे प्रो. के.सी. उपाध्याय को लिखा गया पत्र, भारतीय जनसंघ के नेताओं को लिखे पत्र, आलेख और पुस्तकें। ये सभी वस्तुएं अब लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा-स्थल संग्रहालय में आमजन के दर्शनार्थ सुरक्षित रखी गई हैं।
संघर्ष और बलिदान की पृष्ठभूमि
चन्द्रशेखर उपाध्याय ने भावुक संदर्भ में बताया कि उनके पिता प्रो. केसी उपाध्याय को आपातकाल के दौरान मीसा बंदी बनाकर जेल में रखा गया था, जहां कथित रूप से धीमा जहर दिए जाने के कारण अल्पायु में उनका निधन हो गया। यह परिवार का वह पक्ष है, जिसे लंबे समय तक सार्वजनिक मंचों पर स्थान नहीं मिला।
चन्द्रशेखर उपाध्याय का भावुक वक्तव्य
उन्होंने कहा कि यह अतीव आनंद का विषय है कि जिन बप्पा-दादाजी और उनकी संस्था का नाम लेने से कभी सरकारें कांपती थीं, आज वही सरकारें उनके भव्य स्मारक बना रही हैं। उनकी रोजमर्रा की वस्तुएं संग्रहालय में रखी जा रही हैं। वर्षों से परिवार द्वारा संरक्षित धरोहरें मैंने आदित्यनाथ भैया की सरकार को सौंप दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब लखनऊ के इस संग्रहालय में उनके परिवार का विधिवत उल्लेख, चित्र और विवरण प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने राजनाथ सिंह, आनन्दीबेन पटेल और योगी आदित्यनाथ सहित शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान दशकों पहले भी दिया जा सकता था।
राजनीतिक और वैचारिक संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह आयोजन केवल स्मारक लोकार्पण नहीं, बल्कि भाजपा-संघ की वैचारिक जड़ों को पुनः सार्वजनिक रूप से स्थापित करने का संदेश भी है, जिसमें अब परिवार और विरासत को भी औपचारिक मान्यता दी जा रही है।