पर्यावरण व विकास में संतुलन की नई राह की जरूरतः टीटीज़ेड ढांचे की वैज्ञानिक समीक्षा हो, स्पष्ट नीति बने और तकनीक-आधारित समाधान ज़मीन पर उतारें जाएं, पूरन डावर ने सीएम योगी को भेजे पत्र में दिये सुझाव

आगरा के उद्योगों, कामगारों और आम नागरिकों पर चार दशकों से छाया टीटीज़ेड प्रतिबंधों का साया एक बार फिर सुर्खियों में है। इस जटिल और लंबे समय से उलझे मुद्दे को नई दिशा देने की कोशिश करते हुए डेवलपमेंट काउंसिल ऑफ फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन पूरन डावर ने विगत दिवस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया है कि आगरा का औद्योगिक भविष्य तभी सुरक्षित हो सकता है, जब टीटीज़ेड ढांचे की वैज्ञानिक समीक्षा हो, स्पष्ट नीति बने और तकनीक-आधारित समाधान ज़मीन पर उतारें जाएं। उनके अनुसार, आज जरूरत कड़े और अस्पष्ट प्रतिबंधों की नहीं, बल्कि ऐसी वैज्ञानिक व्यवस्था की है जो पर्यावरण की रक्षा भी करे और आगरा की आजीविका और औद्योगिक विकास को भी मजबूती दे।

Dec 9, 2025 - 15:14
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पर्यावरण व विकास में संतुलन की नई राह की जरूरतः  टीटीज़ेड  ढांचे की वैज्ञानिक समीक्षा हो, स्पष्ट नीति बने और तकनीक-आधारित समाधान ज़मीन पर उतारें जाएं, पूरन डावर ने सीएम योगी को भेजे पत्र में दिये सुझाव

आगरा। आगरा के उद्योगों, कारीगरों और नागरिकों पर वर्षों से मंडरा रहे टीटीज़ेड (टीटीजेड) प्रतिबंधों के संकट को लेकर डेवलपमेंट काउंसिल ऑफ फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन पूरन डावर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक महत्वपूर्ण प्रतिवेदन दिया। इसमें टीटीज़ेड नीतियों की गलत व्याख्या, सुप्रीम कोर्ट में चार दशक से लंबित मामले की वजह से उद्योगों और आजीविका पर पड़ रहे गहरे असर की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा गया है कि आधुनिक रियल टाइम मॊनिटरिंग सिस्टम को अपनाने की तत्काल आवश्यकता है। आगरा का औद्योगिक भविष्य तभी सुरक्षित हो सकता है, जब टीटीज़ेड ढांचे की वैज्ञानिक समीक्षा, स्पष्ट नीति और तकनीक-आधारित समाधान लागू हों।

टीटीजेड नियमों की गलत व्याख्या और दुरुपयोग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग लागू करें

श्री डावर ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया है कि पर्यावरण संरक्षण सभी की साझा जिम्मेदारी है, परंतु टीटीज़ेड के नाम पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की वर्षों से गलत व्याख्या और गलत क्रियान्वयन किया गया है। इसके परिणामस्वरूप उद्योगों पर अनावश्यक रोक, नई इकाइयों को अनुमोदन में बाधा, निवेश में गिरावट और बड़े पैमाने पर रोजगार हानि जैसी स्थिति ने आगरा की औद्योगिक रीढ़ कमजोर कर दी है। कुछ स्वार्थी तत्वों ने टीटीज़ेड के प्रावधानों का दुरुपयोग औद्योगिक गतिविधियों को रोकने के हथियार की तरह किया, जो कानून व संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।

काम के मौलिक अधिकार पर चोट: 40 वर्ष से लंबित वाद का दुष्प्रभाव

डेवलपमेंट काउंसिल ऑफ फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन ने स्पष्ट कहा कि एम.सी. मेहता वाद, जो 1984 से सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, ने आगरा के हजारों उद्योगों को नियमों की अनिश्चितता के साये में धकेल दिया है। अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत काम–व्यवसाय के मूल अधिकार पर इसका सीधा असर पड़ा है। कठोर प्रतिबंध और अस्पष्ट नीतियां एमएसएमई, फुटवियर व लैदर इकाइयों और लाखों श्रमिकों के लिए असुरक्षा, आर्थिक कठिनाई और भविष्य को लेकर गहरी चिंता का कारण बन रही हैं।

ऑडिट आधारित व्यवस्था की जगह आधुनिक तकनीक अपनाने की जरूरत

ज्ञापन में कहा गया है कि आज विश्व भर में औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण के लिए रियल-टाइम उत्सर्जन मॉनिटरिंग, आईओटी (IoT) सेंसर, डिजिटल लॉग, एआई आधारित अलर्ट, ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। आगरा के उद्योग इस पूरी प्रणाली को 24×7 लागू करने को तैयार हैं। सरकारी पोर्टल से डेटा एकीकरण और सतत उत्सर्जन ट्रैकिंग पूरी तरह संभव है। उन्होंने कहा कि कंबल-नुमा प्रतिबंध समाधान नहीं, बल्कि आधुनिक मॉनिटरिंग ही वास्तविक पर्यावरणीय न्याय है।

व्यापक नीति-समीक्षा की माँग: छह प्रमुख सुझाव

ज्ञापन में टीटीज़ेड की वैज्ञानिक समीक्षा की तात्कालिक आवश्यकता बताते हुए छह प्रमुख सुझाव दिए गए हैं। ये हैं- कंबल-नुमा प्रतिबंध हटाकर रियल-टाइम मॉनिटरिंग लागू की जाए। मनमाने प्रतिबंध समाप्त कर स्थिर व स्पष्ट नीति जारी हो। सभी निर्णय वास्तविक उत्सर्जन डेटा पर आधारित हों। पर्यावरण नियम नागरिकों और उद्योगों के संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप बनाए जाएं। टीटीज़ेड प्रावधानों के दुरुपयोग की जांच और रोकथाम की जाए। 1984 से लंबित मामले के समाधान हेतु उच्च-स्तरीय नीति हस्तक्षेप हो।

कृषि-वानिकी पर अनजाने में पड़ा गहरा असर

ज्ञापन के अनुसार टीटीज़ेड में सभी भूमि पर पेड़ कटान पर पूर्ण रोक ने किसानों को नई पौधारोपण और दीर्घकालीन बागवानी से दूर कर दिया है। इसका परिणाम इलाक़े में हरीतिमा में कमी, एग्रो फॊरेस्ट्री का लगभग ठप होने और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव के रूप में सामने आ रहा है। डावर ने कहा कि कठोर प्रतिबंधों ने पेड़ लगाने की प्रेरणा समाप्त कर दी है, जबकि जरूरत वैज्ञानिक, लचीली और मॉनिटरिंग-आधारित नीति की है।

एमएसएमई और लेदर–फुटवियर क्लस्टर पर गहरा आर्थिक दुष्प्रभाव

उन्होंने कहा कि टीटीज़ेड की वर्तमान नीति ने एमएसएमई, निर्यातक इकाइयों, लैदर–फुटवियर उद्योग, कारीगरों और हजारों दिहाड़ी श्रमिकों पर गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर दिया है। डावर ने चेताया कि यदि तुरंत समाधान नहीं मिला तो आगरा औद्योगिक गिरावट, रोजगार संकट और प्रतिस्पर्धात्मकता में भारी कमी का सामना करेगा।

विज्ञान आधारित नीति ही समाधान

श्री डावर ने ज्ञापन में मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि आगरा के उद्योगों और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हेतु व्यक्तिगत हस्तक्षेप करें। उन्होंने कहा कि विज्ञान-आधारित, तकनीक-सक्षम और रियल टाइम मॊनिटरिंग पर आधारित व्यवस्था ही 1984 से लंबित मामले का स्थायी समाधान दे सकता है। यह आगरा के विकास, न्याय और संतुलित पर्यावरण संरक्षण तीनों के लिए अनिवार्य है।

SP_Singh AURGURU Editor