राधाष्टमी पर ‘राधायन’ काव्य कृति का लोकार्पण, कवियों ने ब्रज की रंगत बिखेरी

आगरा। संस्कार भारती जिला आगरा (ब्रज प्रांत) के तत्वावधान में राधाअष्टमी पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन रोज़ अपार्टमेंट जीवनी मंडी पर बड़े हर्षोल्लास के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. ब्रज बिहारी लाल 'बिरजू' की ब्रजभाषा में रचित काव्य कृति ‘राधायन’ का लोकार्पण हुआ।

Aug 31, 2025 - 21:59
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राधाष्टमी पर ‘राधायन’ काव्य कृति का लोकार्पण, कवियों ने ब्रज की रंगत बिखेरी
डॉ. ब्रज बिहारी लाल 'बिरजू' की ब्रजभाषा में रचित काव्य कृति ‘राधायन’ का लोकार्पण करते कविगण।

कार्यक्रम का शुभारंभ मथुरा से पधारे सनातन ब्रजकवि नीरज शास्त्री ने दीप प्रज्ज्वलन और माँ शारदे की प्रतिमा पर माल्यार्पण से किया।

मुख्य अतिथि जबलपुर के वरिष्ठ कवि नरेंद्र शर्मा ने कहा कि ब्रज संस्कृति भारत के गौरवशाली साहित्य को सुशोभित करने वाली संस्कृति है। यह राधारानी और श्रीकृष्ण की अलौकिक छवि के माध्यम से हमारे मन-मस्तिष्क को आध्यात्मिक साक्षात्कार कराती है।

अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय कवि डॉ. राजेन्द्र मिलन ने सुझाव दिया कि ब्रज भाषा के उत्थान के लिए ब्रज फाउंडेशन का गठन होना चाहिए, जो ब्रज संस्कारशाला की भूमिका निभाए।

मुख्य वक्ता राज बहादुर ‘राज’ ने कहा कि लुप्त होती ब्रज लोक कला, साहित्य और संस्कृति को पुनर्जीवित करना साहित्यकारों का दायित्व है। वहीं, कृति के रचयिता डॉ. बिरजू ने कहा कि राधायन पूरी तरह से ब्रजरज को समर्पित रचना है, जिसका उद्देश्य ब्रज भाषा का विस्तार है।

आमंत्रित कवियों में डॉ. राघवेंद्र शर्मा ‘राघव’, डॉ. यशोयश, जितेंद्र जैन, यतेन्द्र सोलंकी, विनय बंसल, रामेन्द्र शर्मा, डॉ. सुकेशिनी दीक्षित, प्रेमलता शर्मा, अनुज अनुभव, राकेश निर्मल, संगीता शर्मा, यशोधरा यादव, वंदना तिवारी, शिव मोहन, राम अवतार शर्मा, कामेश मिश्र, उमाशंकर पाराशर, प्रखर अवस्थी, संजय कुमार, देवेंद्र थापक आदि ने ब्रज की रंगत बिखेर खूब वाहवाही लूटी।

सरस्वती वंदना प्रेमलता शर्मा ने की, अतिथि स्वागत यतेन्द्र सोलंकी ने किया। संचालन डॉ. यशोयश ने किया और धन्यवाद ज्ञापन जितेंद्र जैन ने किया।

SP_Singh AURGURU Editor