उत्तू गांव हादसे पर राहुल-प्रियंका ने भेजा शोक संदेश, मुआवज़े व नौकरी की मांग तेज
आगरा। फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के गांव उत्तू में रविवार को हुए भीषण हादसे में मिट्टी की ढाय गिरने से एक ही परिवार की तीन महिलाओं और एक पुरुष की दर्दनाक मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। भाजपा व कांग्रेस नेताओं और संगठनों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर सांत्वना दी और सरकार से 25 लाख रुपए मुआवजा और नौकरी की मांग की।
-कांग्रेस और भाजपा नेताओं ने जताई संवेदना, पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने उठाई नौकरी की मांग
कांग्रेस विधानमंडल दल के पूर्व नेता प्रदीप माथुर के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने उत्तू गांव पहुंचकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का शोक संदेश पीड़ित परिवारों को सौंपा। उन्होंने डीएम भरतपुर कमर उल जमा चौधरी और डीएम आगरा अरविंद मल्लप्पा बंगारी से बातचीत कर मुआवजे की मांग की और चंबल परियोजना में मिट्टी की ढाय गिरने से मृत लोगों के आश्रितों को नौकरी दिलाने की बात भी रखी।
इस प्रतिनिधिमंडल में कंग्रेस जिलाध्यक्ष रामनाथ सिकरवार, राघवेंद्र मीनू, अरुण शर्मा, चौधरी अशोक सिंह, मनोज बोहरा, अमित कुमार, मानसिंह माहुरा सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस नेता प्रदीप माथुर ने कमिश्नर शैलेंद्र कुमार सिंह से भी बात कर पीड़ितों को शीघ्र क्षतिपूर्ति दिलाने का आग्रह किया।
भाजपा किसान नेता पहुंचे गांव, चार लाख की आर्थिक मदद की मांग की
भाजपा किसान मोर्चा के नेता मोहन सिंह चाहर पीड़ित परिवार से मिलने उत्तू गांव पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों को ढांढस बंधाया और एसडीएम किरावली नीलम तिवारी से बात कर मुख्यमंत्री कोष व कृषक दुर्घटना सहायता योजना के अंतर्गत चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की।
उनके साथ महावीर सिंह प्रधान, केशवदेव शर्मा, भीष्मपाल सोलंकी समेत कई भाजपा नेता मौजूद रहे।
किसान सेना ने सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन, 25 लाख की मुआवजे की मांग
किसान सेना ने तहसील किरावली में नायब तहसीलदार शुभ्रा अवस्थी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि गरीब मृतकों के परिजनों को प्रत्येक को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
किसान सेना प्रमुख मुकेश डागुर ने कहा कि जब सरकार अन्य हादसों में आर्थिक मदद करती है, तो इन गरीबों के लिए भी उचित राहत मिलनी चाहिए।
ज्ञापन देने वालों में थानसिंह प्रधान, रामकुमार प्रधान, बच्चू सिंह सोलंकी, लाला इन्दौलिया, योगेश इन्दौलिया, नेत्रपाल चाहर समेत सैकड़ों किसान शामिल थे।