राम मंदिर चढ़ावा कांड से सियासत में उबाल, चंपत राय पर सवालों की बौछार, योगी के संकेतों ने बढ़ाई बेचैनी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय पर सवाल तेज हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे से चंपत राय को दूर रखने की चर्चा। एसआईटी जांच में अब तक पांच नाम सामने आए, करीब दो करोड़ रुपये की रिकवरी होने का दावा। पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह ने 2021 से अनियमितताओं की जानकारी होने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं, संत समाज और विपक्ष की ओर से निष्पक्ष जांच व जवाबदेही की मांग। काशी विश्वनाथ मॉडल पर राम मंदिर में आईएएस अधिकारी को सीईओ बनाने पर विचार। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील बन गया है।
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धार्मिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़े विवाद का रूप लेता जा रहा है। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सवालों का दबाव बढ़ता जा रहा है। संघ परिवार, भाजपा के कुछ नेताओं और संत समाज के एक वर्ग की नाराजगी भी अब खुलकर सामने आने लगी है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को प्रस्तावित अयोध्या दौरे के दौरान मुख्यमंत्री रामलला के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे, लेकिन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को उनके कार्यक्रम से दूर रखने की तैयारी की गई है। प्रशासन द्वारा जारी प्रोटोकॉल में चंपत राय से किसी अन्य प्रतिनिधि को नामित करने का अनुरोध किया गया है। यदि यह जानकारी आधिकारिक रूप से पुष्ट होती है, तो इसे चंपत राय से सरकार की बढ़ती दूरी के संकेत के रूप में देखा जाएगा।
चढ़ावा चोरी से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत तब हुई जब चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम के एक नए कर्मचारी की कथित हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई। आरोप है कि उसने नोटों की एक गड्डी छिपाने का प्रयास किया। पूछताछ में उसने चढ़ावे की रकम में लंबे समय से चल रही कथित हेराफेरी से जुड़े कई खुलासे किए। इसके बाद मामला सार्वजनिक हुआ और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, जबकि पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने मंदिर से 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की चोरी का दावा किया। हालांकि ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चढ़ावे की राशि का नियमित ऑडिट कराया जाता है और किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं मिली है।
एसआईटी जांच में अब तक क्या मिला?
बवाल बढ़ने के बाद सरकार ने मामले जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) लगातार मंदिर परिसर और ट्रस्ट से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। अब तक लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव सहित पांच लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। चढ़ावा चोरी मामले का मुख्य आरोपी रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि टिन्नू चंपत राय के करीबी लोगों में शामिल था। मंदिर परिसर की कई व्यवस्थाएं चंपत राय के कहने पर वही देखता था।
सूत्रों के मुताबिक उनकी निशानदेही पर करीब दो करोड़ रुपये की रिकवरी भी हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यदि दानपेटियों से रकम की हेराफेरी हुई, तो इतनी बड़ी व्यवस्था में इसकी जिम्मेदारी किसकी थी और लंबे समय तक यह गतिविधि कैसे चलती रही।
चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर उठ रहे सवाल
मंदिर प्रशासन की पूरी व्यवस्था में महासचिव चंपत राय की भूमिका सबसे प्रभावशाली मानी जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद भी ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को तुरंत अवगत क्यों नहीं कराया गया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में देरी क्यों हुई। ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और परिसर व्यवस्थापक गोपाल राव की भूमिका पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। आरोप है कि सीसीटीवी फुटेज की नियमित निगरानी और दान गिनने वाले कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में लापरवाही बरती गई।
पूर्व लेखाकार के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किल
मामले को और गंभीर तब माना जाने लगा जब मंदिर के पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह सामने आए। उन्होंने दावा किया कि चढ़ावे में गड़बड़ी कोई नई बात नहीं है, बल्कि वर्ष 2020-21 से यह सिलसिला चल रहा है। उनका आरोप है कि उन्होंने 2021 में भी चोरी की शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें जिम्मेदारी से हटा दिया गया। महिपाल सिंह ने यह भी दावा किया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य आभूषणों का समुचित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
संत समाज और भाजपा के भीतर भी बेचैनी
इस प्रकरण के सामने आने के बाद ट्रस्ट से जुड़े लोगों की जीवनशैली और आर्थिक स्रोतों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने मांग की है कि चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को जांच पूरी होने तक ट्रस्ट से अलग कर निष्पक्ष पूछताछ कराई जाए। भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग किए जाने के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राम मंदिर में आईएएस अधिकारी को सीईओ बनाने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार सरकार राम मंदिर प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर मंदिर में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने का प्रस्ताव चर्चा में है। इससे मंदिर की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में अधिक पारदर्शिता लाने की कोशिश की जा सकती है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की चुनौती
राम मंदिर भाजपा की सबसे बड़ी वैचारिक और राजनीतिक उपलब्धियों में गिना जाता है। ऐसे में मंदिर से जुड़ा कोई भी विवाद सीधे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाता है। विपक्ष पहले ही इस मुद्दे को भाजपा और ट्रस्ट की जवाबदेही से जोड़ रहा है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यदि जांच में और बड़े खुलासे होते हैं, तो यह भाजपा के लिए राजनीतिक असहजता का कारण बन सकता है।
वहीं सरकार के लिए चुनौती होगी कि वह जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाकर जनता का विश्वास बनाए रखे। फिलहाल सभी की निगाहें एसआईटी जांच, ट्रस्ट की अगली प्रतिक्रिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मामला धार्मिक आस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक प्रभाव तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।