राणा सांगा वाद हुआ निरस्त, वादी पक्ष जिला जज कोर्ट में दायर करेगा रिवीजन

आगरा। आगरा के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में चल रहे बहुचर्चित राणा सांगा वाद को न्यायालय ने पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दिया है। यह वाद अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह द्वारा दाखिल किया गया था, जिसमें उन्होंने एक सार्वजनिक बयान को लेकर उदघोषणा की मांग की थी।

Apr 18, 2025 - 19:08
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राणा सांगा वाद हुआ निरस्त, वादी पक्ष जिला जज कोर्ट में दायर करेगा रिवीजन

वादी अधिवक्ता ने बताया कि 24 मार्च को न्यायालय ने मामले की पोषणीयता और वादी के अधिकार को लेकर सुनवाई की तिथि 10 अप्रैल नियत की थी। निर्धारित तिथि पर अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने अदालत के समक्ष अपने तर्क रखे, जिसमें उन्होंने वादी के अधिकार, क्षेत्राधिकार और मामले की पोषणीयता पर विस्तार से बहस की थी।

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि वादी जिस तथ्य को उदघोषित करवाना चाहते हैं, वह ऐतिहासिक विषय है, न कि ठोस कानूनी तथ्य। इसके अलावा, जिस बयान को आधार बनाकर वाद दायर किया गया, वह संसद में दिया गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत संसद में दिए गए बयानों को विशेषाधिकार प्राप्त है। इस कारण इस पर कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती।

वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह का कहना है कि वे इस आदेश के विरुद्ध जिला जज की अदालत में रिवीजन याचिका दायर करेंगे। अधिवक्ता सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने वादपत्र में यह कहीं नहीं लिखा कि विपक्षी रामजीलाल सुमन ने संसद में बयान दिया। सिविल वाद की पोषणीयता वादपत्र में उल्लिखित कथनों के आधार पर ही तय की जाती है। बिना प्रतिवादी के लिखित उत्तर के यह कैसे मान लिया गया कि बयान संसद में दिया गया है? उन्होंने यह भी कहा कि हर ऐतिहासिक प्रश्न भी अंततः एक तथ्य होता है, जिसे परखा जा सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor