नगर कीर्तन में रंजीत अखाड़ा और बच्चियां के युद्ध कला करतब रोमांचित करेंगे

आगरा। गुरु गोविंद सिंह महाराज के प्रकाश पर्व से पूर्व पांच जनवरी को आगरा में निकाले जा रहे विशाल नगर कीर्तन में इस बार भी गतका मुख्य आकर्षण होगा। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, माईथान से निकलने वाले इस नगर कीर्तन के मुख्य आकर्षणों में एक आकर्षण गुरुद्वारा गुरु का ताल का रंजीत अखाड़ा भी होगा।

Jan 2, 2025 - 19:07
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नगर कीर्तन में रंजीत अखाड़ा और बच्चियां के युद्ध कला करतब रोमांचित करेंगे
गुरुद्वारा गुरु का ताल में नगर कीर्तन के लिए प्राचीन युद्ध कला गतका का अभ्यास करते रंजीत अखाड़ा के सदस्य।

रंजीत अखाड़े के वीर प्राचीन सिख मार्शल आर्ट गतका का शानदार प्रदर्शन इस नगर कीर्तन में करेंगे। इसके लिए इन दिनों गुरुद्वारा गुरु का ताल में इस प्राचीन युद्ध कला का अभ्यास चल रहा है। गुरुद्वारा गुरु का ताल में संचालित रंजीत अखाड़े के विद्यार्थी गतके का अभ्यास कर रहे हैं। 

गुरुवार को रंजीत अखाड़े के विद्यार्थियों ने गुरुद्वारा गुरु का ताल के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह की निगरानी में रिहर्सल की। इस दौरान 5 वर्ष की उम्र से लेकर 18 वर्ष तक के विद्यार्थियों ने युद्ध कला का शानदार प्रदर्शन किया। शुरुआत पैतरेबाजी से की गई। इसके साथ-साथ विभिन्न तरह के प्राचीन शास्त्रों के माध्यम से भी विद्यार्थियों ने प्राचीन कला का प्रदर्शन किया।

गुरुद्वारा गुरु का ताल के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा गुरु का ताल में लगभग 50 वर्ष पूर्व संत बाबा साधू सिंह मोनी जी ने शस्त्र विद्या सिखाने की शुरुआत की थी। तभी से ही प्राचीन युद्ध कला गतका यहां सिखाया जाता है। उन्होंने बताया कि सिख धर्म में संत सिपाही की परिकल्पना को साकार किया गया है, जिसका उद्देश्य शास्त्र और शास्त्र एक साथ रखने के लिए कहा गया है।

रिहर्सल के दौरान मौजूद गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा माईथान के प्रधान कवलदीप सिंह और हेड ग्रंथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह ने बताया कि नगर कीर्तन में गतका आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है।

इन शस्त्रों का होता है प्रदर्शन

गुरुद्वारा गुरु का ताल के मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह ने बताया कि गतके में मुख्य रूप से तलवार, ढाल, दोधारी तलवार, कटार, खंजर, भाला, बरछा, खुखरी, नेजा, गोला,  कांटेदार गोला, चक्र, 10 फूटी तलवार का मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है। गुरुद्वारा गुरु का ताल में मास्टर सतवीर सिंह सुशील विद्यार्थियों को इस प्राचीन सिख मार्शल आर्ट में पारंगत कर रहे हैं।

छोटी बच्चियां भी करेंगी गतका का प्रदर्शन

गुरुद्वारा गुरु ताल में संचालित रंजीत अखाड़े में बालकों के साथ-साथ छोटी-छोटी बालिकाएं भी प्रशिक्षण ले रही हैं। संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ शुरू करते हुए जहां पुरुषों के नाम के साथ उपनाम सिंह यानी शेर जोड़ा तो वहीं महिलाओं के लिए कौर यानी राजकुमारी उपनाम दिया। गतके में आज बालिकाएं बहुत शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।

यह रहे मौजूद

गतका रिहर्सल के दौरान गुरुद्वारा गुरु का ताल के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह, जत्थेदार राजेंद्र सिंह, बाबा अमरीक सिंह, महंत हरपाल सिंह, ग्रंथी अजायब सिंह, हरबंस सिंह, गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा माईथान के प्रधान कवलदीप सिंह, ग्रंथी कुलविंदर सिंह, बंटी ग्रोवर ,वीरेश सिंह मौजूद रहे।

SP_Singh AURGURU Editor