बागी हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह छह साल के लिए भाजपा से सस्पेंड, नतीजे आते ही लिया गया एक्शन

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की बंपर जीत के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने बागी चेहरे और पूर्व केंद्रीय मंत्री राज कुमार सिंह उर्फ़ आरके सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया। लगातार पार्टी विरोधी बयानबाज़ी और विवादित टिप्पणियों के बाद कार्रवाई के तौर पर बीजेपी ने उन्हें शोकॉज नोटिस भी थमाया है। आरके सिंह, जो कभी मोदी सरकार के अहम मंत्री रहे,  पिछले कुछ समय से अपनी ही पार्टी को कठघरे में खड़ा करते हुए खुले मंच से दागदार चेहरों को टिकट देने पर सवाल दागते आ रहे थे।

Nov 15, 2025 - 22:11
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बागी हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह छह साल के लिए भाजपा से सस्पेंड, नतीजे आते ही लिया गया एक्शन

पटना/नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए को मिली बंपर जीत का जश्न खत्म भी नहीं हुआ था कि पार्टी ने अपने ही दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह के खिलाफ एक कड़ा कदम उठा लिया। आरा से दो बार सांसद रह चुके और ऊर्जा मंत्री रहे आरके सिंह को भाजपा ने तत्काल प्रभाव से छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है। उन्हें नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उन्हें पार्टी से निष्कासित क्यों न किया जाए।

बीजेपी की तरफ से जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि उनके बयान और गतिविधियां पार्टी लाइन के बिल्कुल खिलाफ हैं। यह भी ज्ञातव्य है कि आरके सिंह ने चुनाव प्रचार के दौरान सम्राट चौधरी से लेकर अनंत सिंह और ओसामा शहाब जैसे उम्मीदवारों को वोट न देने की अपील की थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था- ऐसे नेताओं को वोट देने से अच्छा है चुल्लू भर पानी में डूब मरना।

आरके सिंह ने बिहार चुनाव से पहले भी पार्टी के टिकट वितरण पर गंभीर आरोप लगाए थे। फरवरी 2025 में भोजपुर में एक कार्यक्रम के दौरान आरके सिंह ने यह भी कहा था कि बीजेपी के कुछ नेताओं ने भोजपुरी स्टार पवन सिंह को करोड़ों में खरीदकर काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़वाया था, जिससे एनडीए प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा चुनाव हार गए थे।

चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों से भी आरके सिंह ने दूरी बनाई थी। इसी के साथ उन्होंने यह भी दावा किया कि आरा से उनकी हार बीजेपी की अंदरूनी साज़िश का नतीजा थी।

आठ दागदारों की लिस्ट: सम्राट से अनंत सिंह तक सब पर निशाना

चुनाव से ठीक पहले एक वायरल वीडियो में आरके सिंह ने आठ नेताओं के नाम लेकर उनकी आपराधिक छवि पर हमला बोला। उनकी सूची में सम्राट चौधरी, अनंत सिंह, ओसामा शहाब, विभा देवी, भगवान सिंह कुशवाहा, राधा चरण साह, दीपक यादव और सूरजभान सिंह जैसे नाम शामिल थे। उन्होंने कहा था कि  किसी भी अपराधी या भ्रष्ट व्यक्ति को वोट मत देना। चाहे वह आपकी जाति का क्यों न हो। अगर सभी ऐसे हैं, तो नोटा को वोट दें।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब वे पटना के डीएम थे, तो अनंत सिंह को पीटकर भगा दिया था और अब ऐसे लोगों का चुनाव लड़ना लोकतंत्र के लिए खतरा है।

आरके के तीर नहीं थमे: अनुपस्थित नामों पर सवाल भी उठे थे

आरके सिंह की इस सूची में मोकामा के बाहुबली नेता आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद का नाम नहीं होने से उनके विरोधियों ने उन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया था।

बीजेपी ने चुनाव के दौरान आरके सिंह की इस बयानबाजी पर मौन साधे रखा, लेकिन अब इन बयानों का जवाब संगठनात्मक कार्रवाई के रूप में दिया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह आरके सिंह की सियासी विदाई की शुरुआत है या उनका अगला ठिकाना कोई नया मोर्चा होगा?

SP_Singh AURGURU Editor