जोधपुर झाल में पक्षियों का रिकॉर्ड बसेराः 72 प्रजातियों के कुल 1493 जलीय पक्षियों में 32 प्रवासी और 40 स्थानीय, 11 संकटग्रस्त प्रजातियां भी देखने को मिलीं

मथुरा/आगरा। ब्रज तीर्थ विकास परिषद के संरक्षण और वन विभाग की सतत निगरानी का असर जोधपुर झाल वेटलैंड पर साफ दिखने लगा है। एशियन वॉटरबर्ड सेंसस–2026 के तहत रविवार को हुई जलीय पक्षियों की गणना में यहां कुल 1493 पक्षी दर्ज किए गए। लगातार छठे वर्ष हुई गणना में इस बार रिकॉर्ड 72 प्रजातियां सामने आईं, जिनमें आईयूसीएन सूची की 11 संकटग्रस्त प्रजातियां भी शामिल रहीं। यह उपलब्धि ब्रज क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

Jan 18, 2026 - 17:57
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जोधपुर झाल में पक्षियों का रिकॉर्ड बसेराः 72 प्रजातियों के कुल 1493 जलीय पक्षियों में 32 प्रवासी और 40 स्थानीय, 11 संकटग्रस्त प्रजातियां भी देखने को मिलीं
जोधपुर झाल वेटलैंड पर पक्षियों की गणना करती विशेषज्ञों की टीम।

छह साल में सबसे बड़ी उपलब्धि

मथुरा जनपद के फरह क्षेत्र के समीप स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड पर आगरा मंडल की चार प्रमुख नमभूमियों की गणना का शुभारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा विकसित इस वेटलैंड की देखरेख वन विभाग द्वारा की जा रही है। एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के तहत यह लगातार छठा वर्ष रहा, जिसमें अब तक की सर्वाधिक प्रजातियां दर्ज की गईं।

तीन घंटे में 80 हेक्टेयर की गहन गणना

वेटलैंड इंटरनेशनल के उत्तर प्रदेश कॉर्डिनेटर नीरज श्रीवास्तव के निर्देशन में तथा बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (बीआरडीएस) के पक्षी विशेषज्ञ डॊ. केपी सिंह के नेतृत्व में गणना संपन्न हुई।
टीम में डॊ. अमोल शिरोमणि, पलक गुप्ता, निधि यादव, अनुज यादव, अनुज परिहार, आकांक्षा, डॊ. राहुल गुप्ता, अदनान, अमित दिवाकर, विनोद, अनुराग पचैरा, उदय, बलवंत और जीतू शामिल रहे। दो समूहों में बंटी 8 विशेषज्ञ सदस्यों की टीम ने करीब 3 घंटे में लगभग 80 हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वे किया।

72 प्रजातियां, 32 प्रवासी और 40 स्थानीय

गणना में कुल 72 प्रजातियों की पहचान हुई, जिनमें 32 प्रवासी और 40 स्थानीय जलीय पक्षी शामिल रहे। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है, जो वेटलैंड के बेहतर प्रबंधन और सुरक्षित वातावरण को दर्शाता है।

इन पक्षियों की रही सर्वाधिक संख्या

जोधपुर झाल पर इस बार सबसे अधिक संख्या में बार-हेडेड गूज – 387, नॉर्दर्न पिनटेल – 249 और कॉमन टील – 184 पाये गये। इसके अलावा गेडवाल, यूरेशियन विजन, नॉर्दर्न शोवलर, पाइड एवोसेट, लिटिल स्टिंट, टेमिनिक स्टिंट, सैंडपाइपर, वैगटेल, ब्लैक-विंग स्टिल्ट, पर्पल स्वैम्प हेन और कॉमन स्नाइप जैसी प्रजातियां भी रिकॉर्ड की गईं।

पहली बार 11 संकटग्रस्त प्रजातियां मिलीं

इस वर्ष की सबसे अहम उपलब्धि यह रही कि आईयूसीएन की संकटग्रस्त सूची में शामिल 11 प्रजातियां जोधपुर झाल पर दर्ज की गईं। इनमें
सारस क्रेन, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, पेंटेड स्टॉर्क, ओरिएंटल डार्टर, कॉमन पोचार्ड, वूली-नेक्ड स्टॉर्क, ब्लैक-टेल्ड गोडविट, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल, रिवर टर्न, फेरुजिनस पोचार्ड और ब्लैक-हेडेड आइबिस शामिल हैं।

संरक्षण और निगरानी से बढ़ी पक्षियों की आमद

आगरा वृत के मुख्य वन संरक्षक अनिल पटेल के अनुसार वन विभाग की निरंतर निगरानी, सुरक्षा और मानवीय दखल पर नियंत्रण से प्रवासी पक्षियों पर संकट घटा है, जिससे इनकी संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।

नमभूमि विस्तार से बढ़ी जैव विविधता

पक्षी विशेषज्ञ डॊ. केपी सिंह ने बताया कि जोधपुर झाल वेटलैंड पर नमभूमि क्षेत्र का विस्तार कर नए जलीय हैबिटेट विकसित किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप वेटलैंड पर निर्भर पक्षियों की प्रजातियों और संख्या—दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

SP_Singh AURGURU Editor