आगरा में चिकित्सा पेशे की गरिमा बचाने के लिए आईएमए अध्य़क्ष को सौंपा गया सुधार ज्ञापन
आगरा। निजी स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ती व्यावसायिकता, अविश्वास और अनैतिक प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए शहर में अब चिकित्सक समुदाय से सुधार की मांग उठी है। इसी कड़ी में आईएमए, आगरा के नव-निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. हरेंद्र गुप्ता को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें चिकित्सा पेशे की गरिमा और जनता का भरोसा पुनर्स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की गई है। ज्ञापन में सुधार और स्व-नियमन को प्राथमिकता देने वाले पांच बिंदुओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया गया है।
इस सिलसिले में वरिष्ठ पत्रकार और रिवर कनेक्ट केंपेन के संयोजक बृज खंडेलवाल ने आईएमए अध्य़क्ष डॊ. हरेंद्र गुप्ता को भेजे एक ज्ञापन में कहा है कि आगरा में चिकित्सा सेवा धीरे-धीरे सेवा के बजाय एक व्यवसाय के रूप में देखी जाने लगी है, जिससे डॉक्टर और मरीज के बीच का भरोसा कमजोर हुआ है। इस स्थिति को पलटने के लिए आईएमए आगरा को ‘सुधार और स्व-नियमन अभियान’ तत्काल शुरू करना चाहिए।
ज्ञापन में सुझाव दिया गया कि सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में मानकीकृत शुल्क सूची लागू की जाए और अनावश्यक जांच, दवाओं व प्रक्रियाओं से बचने के लिए नैतिक प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू किया जाए।
आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजनाओं से अधिक निजी अस्पतालों को जोड़ा जाए। साथ ही शहर के बाहर सैटेलाइट क्लीनिक या टेलीमेडिसिन केंद्र स्थापित कर ग्रामीण रोगियों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं।
स्थानीय मेडिकल कॉलेजों के सहयोग से डॉक्टरों और नर्सों के लिए अपस्किलिंग कार्यक्रम चलाने और सभी क्लीनिकों को NABH/ISO जैसी मान्यताओं से जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है, ताकि चिकित्सा सेवा की गुणवत्ता एक समान रहे।
ज्ञापन में कहा गया है कि ‘जन संवाद कार्यक्रम’ आयोजित कर जनता को स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक लागत, प्रक्रियाओं और सीमाओं के बारे में अवगत कराया जाए। मीडिया और नागरिक समाज संगठनों के सहयोग से “विश्वास पुनर्निर्माण अभियान” चलाया जाए, जिससे डॉक्टर-मरीज संबंधों में पारदर्शिता और भरोसा बढ़े।
सभी अस्पतालों और क्लीनिकों में ई-रिकॉर्ड प्रणाली और डिजिटल बिलिंग को अनिवार्य बनाने की मांग की गई है। इससे मरीजों का डेटा सुरक्षित रहेगा और विवादों की स्थिति खत्म होगी।
बृज खंडेलवाल ने कहा कि यदि निजी चिकित्सा क्षेत्र खुद सुधार की पहल करेगा, तो जनता का विश्वास अपने आप लौट आएगा और चिकित्सा पेशा पुनः ‘सेवा’ के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने डॉ. गुप्ता से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की है।