नामी नर्सिंग होम में लाखों की हेराफेरी का खुलासा, फर्जी रसीदों से मरीजों से वसूली, चार पर मुकदमा
आगरा। आगरा शहर के एक नामी निजी अस्पताल कमलेश टंडन नर्सिंग होम में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन ने कर्मचारियों पर फर्जी भुगतान रसीद बनाकर मरीजों से अवैध वसूली करने और अस्पताल की आय को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में नर्सिंग होम के संचालक डॉ. अमित टंडन की तहरीर पर थाना हरीपर्वत पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आगरा। आगरा शहर के एक नामी निजी अस्पताल कमलेश टंडन नर्सिंग होम में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन ने कर्मचारियों पर फर्जी भुगतान रसीद बनाकर मरीजों से अवैध वसूली करने और अस्पताल की आय को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में नर्सिंग होम के संचालक डॉ. अमित टंडन की तहरीर पर थाना हरीपर्वत पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
तहरीर के अनुसार, कर्मचारी पंकज कुमार बघेल और आदित्य सिंह पर आरोप है कि उन्होंने कूटरचित भुगतान रसीदें तैयार कर जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच मरीजों से सीधे अपने खातों में और नकद रूप से रकम वसूली। यह राशि अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड में जमा नहीं की गई, जिससे नर्सिंग होम को लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
जांच के दौरान PCPNDT रजिस्टर और कंप्यूटर डेटा में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। रिकॉर्ड के अनुसार, रजिस्टर में 32 अल्ट्रासाउंड दर्ज पाए गए, जबकि कंप्यूटर सिस्टम में केवल 24 अल्ट्रासाउंड की ही एंट्री मौजूद थी। जांच में यह भी सामने आया कि 8 मरीजों को फर्जी रसीदें दी गईं, जिनका भुगतान अस्पताल को प्राप्त नहीं हुआ।
मामले की आंतरिक पड़ताल में दो महिला कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिन पर फर्जीवाड़े में सहयोग करने का आरोप है। जब यह घोटाला उजागर हुआ तो आरोपी पंकज कुमार बघेल ने कथित रूप से दो लाख रुपये अस्पताल को वापस किए, जिससे मामले की गंभीरता और पुष्ट हुई।
थाना हरीपर्वत पुलिस ने बताया कि तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। दस्तावेजों, रजिस्टरों और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला निजी अस्पतालों में आंतरिक नियंत्रण और वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है, वहीं मरीजों के साथ हुए इस कथित धोखे को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करता है।