रेस्क्यू डायरी 2025: आगरा–मथुरा में वाइल्डलाइफ एसओएस ने 1300 से अधिक वन्यजीवों को दिया नया जीवन

तेज़ शहरीकरण, सिकुड़ते प्राकृतिक आवास और चरम मौसम के बीच वर्ष 2025 में वाइल्डलाइफ एसओएस ने आगरा, मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण की मिसाल कायम की। संस्था ने उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से 1,300 से अधिक जंगली जानवरों को समय पर बचाकर सुरक्षित पुनर्वास या प्राकृतिक पर्यावास में लौटाने का कार्य किया।

Jan 3, 2026 - 19:11
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रेस्क्यू डायरी 2025: आगरा–मथुरा में वाइल्डलाइफ एसओएस ने 1300 से अधिक वन्यजीवों को दिया नया जीवन
वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा रेस्क्यू किये गये कुछ वन्यजीवों की तस्वीरें।

आगरा। वर्ष 2025 वाइल्डलाइफ एसओएस के लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ प्रेरणादायक भी रहा। प्राकृतिक आवासों के लगातार सिमटने और मानव अतिक्रमण बढ़ने से जंगली जानवर भोजन, पानी और आश्रय की तलाश में शहरी इलाकों की ओर आने को विवश हुए। भीषण गर्मी, ठंडी हवाओं और मानसूनी परिस्थितियों ने इन चुनौतियों को और गंभीर बना दिया। ऐसे हालात में वाइल्डलाइफ एसओएस की आगरा हेल्पलाइन (+91 9917109666) पर स्तनधारियों, सरीसृपों और पक्षियों से जुड़े सैकड़ों आपात कॉल प्राप्त हुए, जिन पर त्वरित कार्रवाई की गई।

उत्तर प्रदेश वन विभाग के साथ समन्वय में संस्था ने पूरे वर्ष व्यापक बचाव अभियान चलाए। इनमें 600 से अधिक सरीसृपों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा गया। बचाए गए सरीसृपों में मगरमच्छ, मॉनिटर लिज़र्ड और सांपों की कई प्रजातियां, जैसे वुल्फ स्नेक, अजगर और कोबरा शामिल रहीं, जिन्हें आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों, व्यावसायिक स्थलों और खेतों से सुरक्षित निकाला गया।

इसके अलावा, वाइल्डलाइफ एसओएस ने 433 स्तनधारी जीवों का सफल बचाव किया। इनमें नीलगाय, हॉग डियर, लकड़बग्घा, तेंदुए का शावक, सांभर हिरण और कई बंदर शामिल थे। वहीं, 295 पक्षियों, जिनमें भारतीय मोर, बगुला और चील को भी चोट, निर्जलीकरण, जाल में फंसने या पर्यावास में व्यवधान जैसी स्थितियों से बचाया गया।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक एवं सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि 2025 चुनौतीपूर्ण और प्रेरणादायक दोनों रहा। अप्रत्याशित मौसम और मानवीय दबावों के बावजूद हमारी टीम ने त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दी। यह उपलब्धि हमारे कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और वन विभाग के सहयोग के बिना संभव नहीं थी।

संस्था की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा, हर बचाव अभियान भारत की जैव विविधता के संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी की याद दिलाता है। शहरी विस्तार के साथ जानवरों को सुरक्षित मार्ग और पुनर्वास उपलब्ध कराना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर (कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स) बैजूराज एम.वी. ने कहा कि मगरमच्छों से लेकर पक्षियों और बड़े स्तनधारियों तक, हर रेस्क्यू हमारी टीम की दक्षता और साहस को दर्शाता है। हम बचाव और पुनर्वास के साथ-साथ सह-अस्तित्व और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता फैलाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

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SP_Singh AURGURU Editor