आगरा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर रिटायर्ड शिक्षक से ₹25 लाख की ठगी

आगरा के शमसाबाद थाना क्षेत्र के गांव बांगुरी निवासी 68 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक तुकमान सिंह से “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर साइबर ठगों ने ₹25 लाख की ठगी कर ली। 3 मार्च को आए एक फर्जी कॉल में आरोपी ने खुद को इंस्पेक्टर रंजीत बताकर कहा कि उनके मोबाइल नंबर से आतंकियों से संपर्क किया गया है। इसके बाद उन्हें देशविरोधी गतिविधियों में फंसाने, सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। डर के माहौल में पीड़ित ने RTGS के जरिए “वेद इंटरप्राइजेज” नाम के खाते में ₹25 लाख ट्रांसफर कर दिए। अगले दिन परिजनों को बताने पर ठगी का खुलासा हुआ। मामले में थाना साइबर क्राइम आगरा में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

Mar 30, 2026 - 19:25
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आगरा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर रिटायर्ड शिक्षक से ₹25 लाख की ठगी
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फर्जी पुलिस इंस्पेक्टर बनकर बुजुर्ग को डराया, सुप्रीम कोर्ट वारंट और परिवार को नुकसान की धमकी देकर आरटीजीएस से उड़ाई जीवनभर की जमा पूंजी

आगरा। आगरा में साइबर ठगों ने अब ठगी का ऐसा तरीका अपनाया है, जो न सिर्फ खतरनाक है बल्कि बेहद डरावना भी। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर एक 68 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक को फर्जी पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर ₹25 लाख की ठगी कर ली गई। ठगों ने खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताकर पीड़ित को “देशविरोधी गतिविधियों” में फंसाने, सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर रकम ट्रांसफर करवा ली।

आगरा में साइबर ठगों ने अपनी शातिर चाल से एक बुजुर्ग को निशाना बनाया। इस बार ठगी का तरीका था “डिजिटल अरेस्ट”। शमसाबाद थाना क्षेत्र के गांव बांगुरी निवासी 68 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक तुकमान सिंह से साइबर अपराधियों ने ₹25 लाख की ठगी कर ली। पीड़ित ने थाना साइबर क्राइम, आगरा में दर्ज कराई शिकायत में बताया कि 3 मार्च को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को “इंस्पेक्टर रंजीत” बताते हुए कहा कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकियों से संपर्क करने में हुआ है। यह सुनते ही बुजुर्ग घबरा गए।

देशविरोधी गतिविधियों में नाम बताकर डराया

फोन करने वाले ठग ने पीड़ित से कहा कि उनका नाम देशविरोधी गतिविधियों में सामने आया है और उनके खिलाफ गंभीर जांच चल रही है। आरोपी ने बेहद पेशेवर अंदाज में बात करते हुए उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए उन्हें तुरंत “जांच प्रक्रिया” का पालन करना होगा। इसके बाद ठगों ने पीड़ित पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्हें कहा गया कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट वारंट का झांसा

साइबर ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताने के बाद मामला और गंभीर दिखाने के लिए कहा कि उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने वाला है। इतना ही नहीं, पीड़ित को यह भी धमकाया गया कि अगर उन्होंने “वेरिफिकेशन” और “क्लियरेंस” की प्रक्रिया पूरी नहीं की, तो न सिर्फ उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा, बल्कि उनके परिवार को भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इसी डर और दबाव में आकर बुजुर्ग पूरी तरह ठगों के जाल में फंस गए।

आरटीजीएस से खाते में भेजे ₹25 लाख

ठगों ने पीड़ित को एक बैंक खाता उपलब्ध कराया और कहा कि जांच पूरी होने तक उन्हें अपनी रकम “सुरक्षा जांच” के लिए ट्रांसफर करनी होगी। आरोपियों ने यह भरोसा भी दिलाया कि जांच पूरी होते ही पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। डर और भ्रम की स्थिति में फंसे पीड़ित ने RTGS के माध्यम से ₹25 लाख की बड़ी राशि “वेद इंटरप्राइजेज” नाम के खाते में ट्रांसफर कर दी। यह रकम उनकी जीवनभर की जमा पूंजी बताई जा रही है।

अगले दिन परिजनों को बताई बात, तब खुली ठगी की सच्चाई

ठगी का खुलासा तब हुआ, जब अगले दिन पीड़ित ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। परिजनों ने जब पूरी बात सुनी, तो उन्हें तुरंत शक हुआ कि यह फर्जी कॉल और साइबर फ्रॉड का मामला है। इसके बाद परिवार ने पीड़ित को समझाया कि पुलिस या कोर्ट कभी भी इस तरह फोन पर रकम ट्रांसफर नहीं कराते। तब जाकर बुजुर्ग को एहसास हुआ कि वे साइबर अपराधियों की सुनियोजित साजिश का शिकार हो चुके हैं।

थाना साइबर क्राइम में मुकदमा दर्ज, जांच शुरू

घटना की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने थाना साइबर क्राइम, आगरा में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बैंक खाते, मोबाइल नंबर और कॉल डिटेल्स के आधार पर साइबर ठगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में लोगों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि साइबर अपराधी अब फर्जी पुलिस, सीबीआई, ईडी, कोर्ट, कस्टम या अन्य एजेंसियों के नाम पर लोगों को डरा-धमकाकर रकम ऐंठ रहे हैं।

क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ की ठगी?

“डिजिटल अरेस्ट” कोई कानूनी शब्द या आधिकारिक प्रक्रिया नहीं है। यह साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला फर्जी डराने वाला हथकंडा है। इसमें अपराधी फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या कोर्ट अधिकारी बताकर पीड़ित को यह यकीन दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध में फंस गया है।

फिर उसे धमकाया जाता है कि फोन काटना मना है, किसी को बताना मना है, तुरंत बैंक डिटेल दें “वेरिफिकेशन” के नाम पर पैसे ट्रांसफर करें। असल में यह पूरी तरह साइबर ठगी का तरीका है।

ऐसे बचें इस तरह की ठगी से

याद रखें कि पुलिस, सीबीआई, ईडी और कोर्ट कभी फोन पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराते। अगर कोई खुद को अधिकारी बताकर कहे कि आपका नंबर अपराध में इस्तेमाल हुआ है। आपका आधार/सिम मनी लॉन्ड्रिंग में है। सुप्रीम कोर्ट/CBI/ED वारंट है। “सीक्रेट जांच” चल रही है। अभी पैसे ट्रांसफर करो, बाद में वापस मिल जाएंगे, तो तुरंत समझ जाएं कि यह साइबर ठगी है।

तुरंत ये करें

कॉल तुरंत काट दें, किसी परिजन को बताएं, 1930 पर तुरंत कॉल करें cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।  बैंक को तुरंत सूचित करें, किसी भी अनजान खाते में पैसा न भेजें।