वक्फ बिल पर चर्चा से पहले विपक्ष के वॉकआउट पर भड़के रिजिजू, बोले-बहस से बचने का बहाना

वक्फ बिल पर लोकसभा में बुधवार को चर्चा होगी। सरकार ने इस पर आठ घंटे का समय तय किया है। वहीं चर्चा से पहले बिजनेस एडवाइजरी कमिटी की बैठक से विपक्ष के वॉकआउट पर केंद्र ने सवाल उठाए हैं। केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि चर्चा से बचने के लिए विपक्ष बहाने कर रहा।

Apr 1, 2025 - 18:46
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वक्फ बिल पर चर्चा से पहले विपक्ष के वॉकआउट पर भड़के रिजिजू, बोले-बहस से बचने का बहाना


नई दिल्ली। सरकार ने लोकसभा में संशोधित वक्फ विधेयक पर चर्चा के लिए बुधवार को आठ घंटे का समय तय किया है। विपक्ष और कई मुस्लिम संगठनों ने इस बिल पर विरोध जताया है। बावजूद इसके सरकार ने बिल सदन में रखने का फैसला कर लिया है। वहीं विपक्ष की वक्फ विधेयक पर बहस के लिए आवंटित समय को लेकर स्पीकर के साथ तीखी बहस हुई। इसी के बाद विपक्षी पार्टियों ने बिजनेस एडवाइजरी कमिटी की बैठक से वॉकआउट किया। इस घटनाक्रम से बुधवार को संभावित हंगामे की झलक देखने को मिल गई। वहीं पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक न्यूज चैनल को इंटरव्यू में कहा कि विपक्ष का वॉकआउट विधेयक पर चर्चा से बचने का बहाना था। यह विधेयक सरकार को वक्फ संपत्तियों को विनियमित करने और विवादों को निपटाने में अधिकार देगा। रिजिजू ने कहा कि हम वक्फ विधेयक पर चर्चा चाहते हैं, लेकिन विपक्ष केवल डर फैला रहा है और कानून को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। विपक्ष का आज का वॉकआउट चर्चा से बचने का बहाना था। ईसाई समुदाय भी विधेयक का समर्थन कर रहा है।

पिछले हफ्ते, केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल ने राज्य के सांसदों से राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर वक्फ विधेयक का समर्थन करने का आग्रह किया। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने इस विधेयक को असंवैधानिक और मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ बताया है। वक्फ विधेयक एक पुराने कानून में संशोधन करने का प्रस्ताव करता है। यह कानून मुसलमानों की ओर से दान की गई करोड़ों रुपये की संपत्तियों को नियंत्रित करता है।

वक्फ संशोधन बिल को पिछले साल अगस्त में संसद में पेश किया गया था। हालांकि, विपक्ष के विरोध को देखते हुए इसे विचार-विमर्श के लिए बीजेपी नेता जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली एक संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था। यूनियन कैबिनेट ने फरवरी में 14 संशोधनों के साथ विधेयक को मंजूरी दी थी। वक्फ विधेयक में प्रस्तावित बदलावों में वक्फ बोर्डों की संरचना में बदलाव शामिल है।

इसमें गैर-मुस्लिमों को इसके सदस्यों के रूप में शामिल करना अनिवार्य किया गया है। वहीं कानून लागू होने के छह महीने के भीतर प्रत्येक वक्फ संपत्ति को एक केंद्रीय डेटाबेस में पंजीकृत करना भी अनिवार्य किया गया है। हालांकि, यह वक्फ न्यायाधिकरण को कुछ परिस्थितियों में समय सीमा बढ़ाने का अधिकार देता है।

विवादों के मामलों में, एक राज्य सरकार का अधिकारी यह निर्धारित करने का अधिकार रखेगा कि कोई संपत्ति वक्फ है या सरकार की है। पिछले विधेयक में जिला कलेक्टर को निर्धारण प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव था। इस प्रावधान ने काफी विवाद पैदा किया है। मुस्लिम संगठनों का तर्क है कि अधिकारी सरकार के पक्ष में फैसला सुनाएगा। 

यह बिल 4 अप्रैल को संसद सत्र के समाप्त होने से पहले पास हो सकता है। सरकार को उम्मीद है कि एनडीए के सहयोगी इस बिल का समर्थन करेंगे। रिजिजू ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे डर फैला रहे हैं। विपक्ष चर्चा से बचने की कोशिश कर रहा है। विपक्ष का आज का वॉकआउट चर्चा से बचने का बहाना था। ईसाई समुदाय भी बिल का समर्थन कर रहा है। वहीं विपक्ष का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है। उनका कहना है कि यह बिल सरकार को वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण करने की शक्ति देगा। विपक्ष का कहना है कि यह बिल असंवैधानिक है।