आगरा में हुई सड़क सुरक्षा कार्यशाला में सामने आये भयावह आंकड़ेः रोजाना औसतन 44 एक्सीडेंट, डेली दो हजार चालान लेकिन लोग फिर भी नहीं मानते, विशेषज्ञों ने कहा- रफ्तार नहीं, नियम बचाते हैं जीवन, यातायात नियमों के पालन का सामूहिक संकल्प

आगरा। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और आम नागरिकों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से आरटीओ कार्यालय एवं मनोरम ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में यातायात सुरक्षा माह के अंतर्गत आगरा–मथुरा रोड स्थित डावर शू फैक्ट्री परिसर में यातायात सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सड़क सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों, कारणों और बचाव के उपायों पर स्पष्ट, तथ्यपरक और सख्त संदेश दिया गया।

Jan 30, 2026 - 19:01
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आगरा में हुई सड़क सुरक्षा कार्यशाला में सामने आये भयावह आंकड़ेः रोजाना औसतन 44 एक्सीडेंट, डेली दो हजार चालान लेकिन लोग फिर भी नहीं मानते, विशेषज्ञों ने कहा- रफ्तार नहीं, नियम बचाते हैं जीवन, यातायात नियमों के पालन का सामूहिक संकल्प
आगरा–मथुरा रोड स्थित डावर शू फैक्ट्री में परिवहन विभाग एवं मनोरम ग्रुप द्वारा आयोजित सड़क सुरक्षा कार्यशाला को संबोधित करते आरटीओ अखिलेश द्विवेदी। मंच पर आसीन एआरटीओ आलोक अग्रवाल, पूरन डावर, डॉ. संजय चतुर्वेदी, राममोहन कपूर एवं शरद मिश्रा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आरटीओ अखिलेश द्विवेदी, विशिष्ट अतिथि चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चतुर्वेदी, एआरटीओ आलोक अग्रवाल एवं कार्यक्रम अध्यक्ष व मनोरम ग्रुप के चेयरमैन राममोहन कपूर द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।

आगरा में रोज़ औसतन 44 सड़क दुर्घटनाएं

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोरम ग्रुप के चेयरमैन राममोहन कपूर ने कहा कि वाहन चलाते समय जागरूकता और संयम ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि देश में सड़क दुर्घटनाएं सबसे अधिक तमिलनाडु में होती हैं, लेकिन दुर्घटनाओं में मृत्यु दर उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक है। उत्तर प्रदेश में भी आगरा की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, जहां प्रतिदिन औसतन 44 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं।
उन्होंने बताया कि दुर्घटनाओं के पीछे प्रमुख कारण तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और एक पंक्ति में वाहन न चलाने की आदत है। कुल सड़क दुर्घटनाओं में 52 प्रतिशत शिकार दोपहिया वाहन चालक होते हैं, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत गलत दिशा में वाहन चलाने के कारण हादसे का शिकार होते हैं। उन्होंने सड़क संकेतों, नियमों और सुरक्षित ड्राइविंग की विस्तृत जानकारी दी।

हेलमेट जरूरी, लेकिन लापरवाही जानलेवा

हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चतुर्वेदी ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में 48 प्रतिशत पीड़ित पैदल यात्री या साइकिल सवार होते हैं। उन्होंने कहा कि हेलमेट सिर की गंभीर चोट से काफी हद तक बचाता है, लेकिन अत्यधिक तेज टक्कर की स्थिति में उसकी भी सीमाएं होती हैं।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति का जीवन शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। उन्होंने फैक्ट्री संचालकों से अपील की कि श्रमिकों के परिवहन में प्रयुक्त बसों में सीट बेल्ट और इमरजेंसी निकास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
डॉ. चतुर्वेदी ने गोल्डन आवर की जानकारी देते हुए कहा कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अनावश्यक रूप से हिलाना-डुलाना या पलटाना खतरनाक हो सकता है, इससे रीढ़ की हड्डी को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

सड़क सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी

चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और उद्योग जगत की सामूहिक जिम्मेदारी है। उद्योगों में काम करने वाले श्रमिक प्रतिदिन सड़कों पर सफर करते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सबका नैतिक दायित्व है।

उन्होंने कहा कि हेलमेट, सीट बेल्ट और गति सीमा जैसे नियम किसी मजबूरी के लिए नहीं, बल्कि जीवन रक्षक हैं। इनके पालन से असंख्य परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सकता है।

रोज़ 2000 से अधिक चालान, फिर भी लापरवाही जारी

मुख्य अतिथि आरटीओ अखिलेश द्विवेदी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के पीछे मानव त्रुटि के साथ-साथ रोड इंजीनियरिंग भी एक बड़ा कारण है। गलत रोड इंजीनियरिंग से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभाग द्वारा लगातार अध्ययन और सुधार कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि फुट ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं, लेकिन उनका उपयोग करना आमजन की जिम्मेदारी है। यदि पैदल यात्री फुट ओवरब्रिज का प्रयोग करें तो दुर्घटनाओं में निश्चित रूप से कमी आएगी।

आरटीओ ने जानकारी दी कि प्रतिदिन 2000 से अधिक चालान किए जा रहे हैं। उन्होंने वाहन स्वामियों से अपील की कि वाहन की भौतिक स्थिति दुरुस्त रखें, प्रपत्र अपडेट रखें और चालक को पूरी तरह सजग व जिम्मेदार बनाएं, तभी सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

कार्यशाला का संचालन अनुराग जैन ने किया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने यातायात नियमों का पालन करने और दूसरों को भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।

SP_Singh AURGURU Editor