रुहेलखंड विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोहः राज्यपाल आनंदीबेन बोलीं- सीखना जीवन भर की यात्रा
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 23वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने कहा कि छात्राओं की बढ़ती उपलब्धियां गर्व का विषय हैं, परंतु छात्रों के पिछड़ने के कारणों की समीक्षा आवश्यक है। राज्यपाल ने युवाओं को बड़ा सोचने और सशक्त बनने की प्रेरणा दी। समारोह में झारखंड के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संतोष कुमार गंगवार को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया।
-कुलाधिपति ने झारखंड के राज्यपाल को प्रदान किया लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
-आरके सिंह-
बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 23वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि बैक पेपर परीक्षा लेना बंद किया जाए और परीक्षाओं में सभी विद्यार्थियों की 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा जब शिक्षक और छात्र दोनों मिलकर जिम्मेदारी से अध्ययन-शिक्षण प्रक्रिया को मजबूत बनाएं।
राज्यपाल ने कहा कि आज छात्राएं हर क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं, लेकिन यह भी सोचना होगा कि छात्र क्यों पीछे रह जा रहे हैं। इस असंतुलन को सुधारना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि जीवन स्वयं एक सतत सीखने की यात्रा है। विश्वविद्यालय द्वारा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ देने की पहल सराहनीय है, क्योंकि यह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती है।
अपने उद्बोधन में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि सपने वो नहीं जो हमें सोने नहीं देते, बल्कि सपने वो हैं जो हमें नींद ही नहीं आने देते। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे न केवल अपनी सफलता पर ध्यान दें, बल्कि देश को आगे बढ़ाने में भी भागीदार बनें।
कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संतोष कुमार गंगवार को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व की बात है।
आनंदी बेन पटेल ने दिल्ली में हुई हालिया घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस कृत्य को करने वाले पढ़े-लिखे लोग थे, यह और भी ज्यादा पीड़ादायक है। यह घटना भारत को कमजोर करने की मंशा से की गई। उन्होंने सभी से सतर्क रहने और समाज में सकारात्मक सोच फैलाने की अपील की।
राज्यपाल ने कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को सराहनीय कार्य के लिए पुरस्कृत किया और प्राथमिक विद्यालयों के लिए पुस्तकों का विमोचन किया।
उन्होंने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सभी शैक्षणिक संस्थानों में इसके नियमित गायन को प्रोत्साहित करने की अपील की। साथ ही, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाने हेतु विश्वविद्यालयों को विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी मौजूद थे। कुलपति, प्रोफेसरगण, विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं अतिथियों ने भी भाग लिया। राज्यपाल के प्रेरक संबोधन पर हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।