संस्कारहीनता की जड़ गर्भ से शुरू, गर्भाधान संस्कार ही सशक्त भारत की नींवः भागवत विदुषी कीर्ति किशोरी का तीखा संदेश- मातृशक्ति जागेगी तभी संस्कारवान पीढ़ी बनेगी

आगरा। संस्कारवान, यशस्वी और शौर्यवान संतान के लिए गर्भ संस्कार का पालन अनिवार्य है। जब तक गर्भ से ही संस्कारों का बीजारोपण नहीं होगा, तब तक समाज सशक्त नहीं बन सकता। यह स्पष्ट और आक्रामक संदेश वृंदावन धाम की भागवत विदुषी श्री कीर्ति किशोरी ने शुक्रवार को प्रताप नगर, खतैना रोड स्थित नवस्थापित गर्भ संस्कार मैटरनिटी होम में आयोजित प्रवचन के दौरान दिया।

Jan 2, 2026 - 18:25
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संस्कारहीनता की जड़ गर्भ से शुरू, गर्भाधान संस्कार ही सशक्त भारत की नींवः भागवत विदुषी कीर्ति किशोरी का तीखा संदेश- मातृशक्ति जागेगी तभी संस्कारवान पीढ़ी बनेगी
प्रताप नगर, खतैना रोड स्थित गर्भ संस्कार मैटरनिटी होम में शुक्रवार को प्रवचन देतीं भागवत विदुषी श्री कीर्ति किशोरी।

समाजसेवी अशोक गोयल की प्रेरणा से स्थापित इस मैटरनिटी होम में श्री चन्द्रभान साबुन वाले सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने सनातन संस्कृति के मूल स्तंभ गर्भाधान संस्कार की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

गर्भाधान संस्कार: जन्म से पहले का पहला और सबसे बड़ा संस्कार

भागवत विदुषी कीर्ति किशोरी ने कहा कि सनातन धर्म के 16 संस्कारों में गर्भाधान संस्कार पहला और सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है। शास्त्रों के अनुसार, इसी संस्कार से गर्भ में पलने वाली संतान का चरित्र, बुद्धि, साहस और प्रतिभा निर्धारित होती है।
उन्होंने कहा कि आज समाज में बढ़ती संस्कारहीनता का मूल कारण गर्भाधान संस्कार का लोप है। शिशु का मस्तिष्क विकास गर्भ से ही प्रारंभ हो जाता है, ऐसे में मां का आचरण, विचार और जीवनशैली निर्णायक भूमिका निभाती है।

मातृशक्ति की भूमिका सर्वोपरि

प्रवचन में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संयम, नियम और संस्कारों से युक्त जीवन ही भारतीय संस्कृति की पहचान है और इसमें मां की भूमिका केंद्रीय होती है।
उन्होंने कहा कि मातृशक्ति को जागृत किए बिना संस्कारित समाज की कल्पना अधूरी है। इसी उद्देश्य से गर्भ संस्कार मैटरनिटी होम को उन्होंने मातृशक्ति के लिए दिव्य चेतना, कर्तव्यनिष्ठा और प्रेरणा का केंद्र बताया।

सीमित परिवार की सोच पर प्रहार

कीर्ति किशोरी जी ने वर्तमान समय में सीमित परिवार की अवधारणा पर भी चिंता जताई। उन्होंने “हम दो-हमारे दो” की जगह “हम दो-हमारे चार” के संदेश पर जोर देते हुए कहा कि संख्या नहीं, संस्कार राष्ट्र का भविष्य तय करते हैं। उन्होंने- मातृशक्ति तू अब तो जग जा, अब नहीं तो फिर कब जगेगी...गीत के माध्यम से महिलाओं को भारतीय संस्कृति और मातृत्व के गौरव से जोड़ा।

चित्र पर पुष्पांजलि, सम्मान और सहभागिता

प्रवचन से पूर्व उन्होंने लाला चन्द्रभान साबुन वाले के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में ट्रस्ट के अशोक एडवोकेट को पट्टिका पहनाकर सम्मानित किया गया। संचालन समाजसेविका सुमन सुराना ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रमेश चन्द अग्रवाल ने दिया।

इस अवसर पर डॉ. अभिलाषा, राकेश गर्ग, मनोज, राजीव जैन, सचिन गोयल, महेश गोयल, विजय गोयल, कान्ता माहेश्वरी, निधि अग्रवाल, मधु मित्तल, उषा अग्रवाल एवं नंदकिशोर गोयल सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी और महिलाएं उपस्थित रहीं।

SP_Singh AURGURU Editor