आरटीई में गड़बड़ियां: स्कूलों की मनमानी बेनकाब, तीन दिन में कार्रवाई नहीं तो बड़ा आंदोलन
आगरा। शिक्षा के अधिकार कानून की जमीनी हकीकत ने एक बार फिर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरटीई के तहत बच्चों को मिलने वाले अधिकारों में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है, जिसके खिलाफ अभिभावकों ने खुलकर आवाज उठाई है। प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पैरेंट्स अवेयर्स (पापा संस्था) द्वारा अशोक नगर स्थित बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय में आयोजित आरटीई सहायता कैंप में अभिभावकों की पीड़ा खुलकर सामने आई।
स्कूल आवंटन के बाद भी नहीं मिल रहा प्रवेश
कैंप में आई शिकायतों में सबसे गंभीर मामला यह सामने आया कि बच्चों का विद्यालय आवंटन होने के बावजूद स्कूल प्रबंधन उन्हें प्रवेश देने से इंकार कर रहा है। स्कूलों का तर्क है कि उन्हें विभागीय सूची नहीं मिली, जबकि शिक्षा विभाग सूची भेजे जाने की पुष्टि कर चुका है। इससे अभिभावकों में भारी रोष है।
दूरी बनी सबसे बड़ी बाधा
दूसरी बड़ी समस्या दूरस्थ विद्यालयों के आवंटन को लेकर सामने आई। कई अभिभावकों ने बताया कि 3 से 4 किलोमीटर दूर स्कूल मिलने से बच्चों को भेजना बेहद कठिन हो रहा है, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बड़ी चुनौती बन गया है।
प्रतिपूर्ति राशि वर्षों से लंबित
तीसरी श्रेणी में उन अभिभावकों की शिकायतें रहीं, जिनके बच्चों का 2-3 वर्ष पहले आरटीई के तहत प्रवेश हो चुका है, लेकिन अब तक उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि नहीं मिली। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
40 शिकायतें दर्ज, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
कैंप के दौरान पापा संस्था के सदस्य प्राप्ति, मनन और दर्शित ने सभी शिकायतों को दर्ज किया। कैंप कोऑर्डिनेटर ईरम के अनुसार करीब 40 मामलों को संकलित कर प्रशासन और जिलाधिकारी को भेजा जा रहा है।
कार्यक्रम के अंत में दीपक सिंह सरीन ने सभी शिकायतें खंड शिक्षा अधिकारी (नगर) सुमित कुमार सिंह को सौंपते हुए 3 दिन के भीतर समाधान की मांग की।
“अधिकारों का खुला उल्लंघन”
संस्था के संस्थापक दीपक सिंह सरीन ने स्पष्ट कहा कि आरटीई बच्चों का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता अस्वीकार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।