वास्गोडिगामा से पहले रूस के व्यापारी अफानासी निकितिन भारत आए थे: डॉ. इंदिरा गाज़िएवा का खुलासा

आगरा। रूस की भारत और एशिया-अफ्रीका देशों में सदियों पुरानी रुचि का प्रमाण देते हुए रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी, मास्को की डॉ. इंदिरा गाज़िएवा ने बताया कि रूस के व्यापारी अफानासी निकितिन 1469 में वास्गोडिगामा से करीब 30 वर्ष पहले भारत पहुंचे थे। उन्होंने यहां पूर्वी भाषाओं में लिखित पुस्तकों का संग्रह किया था, जो रूस में इंडोलोजी अध्ययन के विकास की नींव साबित हुआ।

Aug 1, 2025 - 20:15
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वास्गोडिगामा से पहले रूस के व्यापारी अफानासी निकितिन भारत आए थे: डॉ. इंदिरा गाज़िएवा का खुलासा
‘भारतीय ज्ञान परंपरा : कल, आज और कल’ विषयक ऒनलाइन द्विसाप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में मौजूद वक्तागण।

यह जानकारी उन्होंने ‘भारतीय ज्ञान परंपरा : कल, आज और कल’ विषय पर आधारित द्विसाप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान ऑनलाइन वक्तव्य देते हुए दी। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के हिंदी तथा भाषाविज्ञान विभाग द्वारा किया गया था।

डॉ. इंदिरा ने रूसी सैन्य मंत्रालय के सहयोग से स्थापित इम्पीरियल कज़ान विश्वविद्यालय की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वहां संस्कृत, बंगाली, हिंदी आदि भाषाओं के अध्ययन के लिए विशेष विभाग बनाए गए थे। 1818 में सेंट पीटर्सबर्ग में स्थापित एशियाई संग्रहालय आज भी विश्व का सबसे बड़ा प्राच्य अध्ययन केंद्र है।

कार्यशाला में हिंदी राइटर्स गिल्ड कनाडा की सह-संस्थापक डॉ. शैलजा सक्सेना ने भारतीय वेदों के ज्ञान और उनकी आधुनिक पीढ़ी में प्रासंगिकता पर बल देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा जीवन के उद्देश्य को स्पष्ट करती है और नयी सोच के साथ उसे जोड़े रखना आवश्यक है।

सेंट जॉन्स कॉलेज आगरा के प्राचार्य प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि आज भी कई ऋषि भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध कर रहे हैं और साहित्य अध्ययन से हमारी संस्कृति की गूंज महसूस होती है।

समाज विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. मोहम्मद अरशद ने परंपराओं और धर्म पर शोध की आवश्यकता बताते हुए योग, आयुर्वेद, वैदिक गणित और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान बढ़ाने पर जोर दिया।

पत्रिका समूह के संपादक एवं एशियाटिक सोसाइटी के सदस्य जितेंद्र नाथ शर्मा ने प्रवासी साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा पर गहन टिप्पणी की।

कार्यशाला में बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य डॉ. नीलम भटनागर, संस्कृत विभाग की डॉ. शशि तिवारी, एनआईएफटीईएम कुंडली के आचार्य डॉ. सुनील पारीक, अर्थशास्त्र विभाग की प्रो. अनुराधा गुप्ता, मंगलायतन विश्वविद्यालय की डॉ. पेरिसा गुप्ता, हिंदी और अंग्रेजी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रमा व डॉ. शीरीन ज़ैदी तथा न्यू जर्सी से डॉ. सुषमा मल्होत्रा ने भी विचार साझा किए। सत्र संचालन कंचन एवं डॉ. मोहिनी दयाल ने किया।

SP_Singh AURGURU Editor