सूर सरोवर पक्षी विहार में पंखों की सरसराहट: प्रवासी पक्षियों की आमद ने बढ़ाई आगरा की जैविक शान, बार हेडेड गूज के झुंड भी नजर आ रहे
आगरा। ताजमहल की नगरी आगरा अब केवल ऐतिहासिक धरोहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रकृति और जैव विविधता के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना रही है। आगरा के रुनकता क्षेत्र स्थित सूर सरोवर (कीठम झील) में इन दिनों प्रवासी पक्षियों की शानदार आमद देखने को मिल रही है, जिसने पर्यावरण प्रेमियों, पक्षी विशेषज्ञों और प्रकृति फोटोग्राफरों को उत्साहित कर दिया है।
आगरा। रुनकता के पास स्थित सूर सरोवर पक्षी विहार इन दिनों सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना बना हुआ है। यहां बड़ी संख्या में दुर्लभ और आकर्षक बार-हेडेड गूज के झुंड देखे जा रहे हैं, जो इस क्षेत्र के स्वस्थ पर्यावरण और समृद्ध जैव विविधता का मजबूत संकेत माने जा रहे हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बार-हेडेड गूज दुनिया के सबसे ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले पक्षियों में शामिल हैं। ये पक्षी तिब्बत, मंगोलिया और मध्य एशिया जैसे अत्यंत ठंडे इलाकों से हर वर्ष सर्दियों में भारत की ओर प्रवास करते हैं। खास बात यह है कि ये पक्षी हिमालय पर्वतमाला को पार करते हुए करीब 29 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं, जो इन्हें अद्वितीय बनाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि अपने मूल निवास स्थानों पर अत्यधिक ठंड और झीलों के जम जाने के कारण ये पक्षी अपेक्षाकृत गर्म, सुरक्षित और भोजन से भरपूर क्षेत्रों की तलाश में प्रवास करते हैं। सूर सरोवर की उथली जलराशि, भरपूर जलीय वनस्पति, शांत वातावरण और कम मानवीय हस्तक्षेप इन्हें विश्राम और भोजन के लिए आदर्श परिस्थितियाँ प्रदान करता है। यही वजह है कि अक्टूबर से मार्च के बीच यहां इनकी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलती है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि किसी भी जलाशय में प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी उस क्षेत्र के जल की गुणवत्ता, पारिस्थितिकी संतुलन और प्राकृतिक स्वास्थ्य को दर्शाती है। सूर सरोवर में बार-हेडेड गूज जैसे दुर्लभ पक्षियों का आना यह स्पष्ट करता है कि यह आर्द्रभूमि अभी भी प्रदूषण से काफी हद तक सुरक्षित है।
पर्यटन की दृष्टि से भी यह आगरा के लिए एक बड़ा अवसर है। विश्व धरोहर ताजमहल के लिए पहचाने जाने वाले आगरा में अब नेचर टूरिज़्म और बर्ड वॉचिंग को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। सूर सरोवर में प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी स्थानीय पर्यटन, प्रकृति फोटोग्राफी और पर्यावरण शिक्षा को नई दिशा दे सकती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे पक्षियों को परेशान न करें, झील क्षेत्र में प्लास्टिक और कचरा न फेंकें तथा इस प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में सहयोग करें। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सूर सरोवर का संरक्षण इसी तरह किया गया, तो भविष्य में यहां और भी दुर्लभ प्रवासी पक्षियों की आमद देखने को मिल सकती है।
-रुनकता से सौरभ सिंह की रिपोर्ट
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