राणा सांगा-सांसद सुमन विवाद में सपा को अब नफा नजर आने लगा है
आगरा। समाजवादी पार्टी को अपने सांसद रामजी लाल सुमन के आवास पर करणी सेना द्वारा किये गये बवाल में अब शायद नफा नजर आने लगा है। यही वजह है कि पिछले दो दिन के दौरान पार्टी ने इस मुद्दे पर नया स्टैंड ले लिया है। इस मुद्दे के जरिए पार्टी की नजर दलित वोट बैंक पर है।
-विवादित बयान के बाद बैक फुट पर चल रही सपा अब इस मुद्दे से राजनीतिक लाभ लेने की फिराक में
मेवाड़ के राजा राणा संग्राम सिंह (राणा सांगा) के बारे में विवादित टिप्पणी कर रामजी लाल सुमन पर चौतरफा प्रहार होने लगे थे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले दिन तो इस मुद्दे पर यह कहकर अपने सांसद का बचाव किया था कि उन्होंने तो ऐतिहासिक तथ्य ही तो रखे हैं। इसके बाद अखिलेश यादव भी लोगों के निशाने पर आये तो उन्होंने यू टर्न लिया और कहा कि सपा राणा सांगा की वीरता पर सवाल नहीं उठा रही और न ही राजपूत बिरादरी का अपमान करने का इरादा है।
इधर रामजी लाल सुमन ने भी राज्यसभा में दिए अपने बयान के बाद बैक फुट पर कहा था कि उनकी मंशा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। अपने बयान पर सफाई भी दी थी। इसके तीन दिन बाद सुमन ने एक बार एक सफाई देते हुए कहा था कि उनके द्वारा राज्यसभा में इतिहास के संदर्भ में दिये गये वक्तव्य की पृष्ठभूमि यह थी कि हमें इतिहास के गड़े मुर्दों को पुनर्जीवित नहीं करना चाहिए।
सांसद सुमन के इन दोनों बयानों से स्पष्ट था कि वे बैक फुट पर हैं। उधर अखिलेश यादव भी बैक फुट पर आ गये थे। इस बीच 26 मार्च को करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने सांसद सुमन के आवास पर प्रदर्शन के दौरान बवाल किया तो समाजवादी पार्टी ने इस मामले में एक नया स्टैंड ले लिया। अब सपा कोशिश कर रही है कि सुमन के आवास पर बवाल को दलित बनाम क्षत्रिय समाज बनाकर दलितों की सहानुभूति हासिल की जाए।
सांसद आवास पर बवाल के दूसरे दिन ही सपा के दो महासचिव राम गोपाल यादव और शिव पाल सिंह यादव आगरा में सांसद सुमन के आवास पर पहुंचकर उनके परिजनों से मिल चुके हैं। राम गोपाल यादव तो आगरा में यह भी ऐलान कर चुके हैं कि ईद के बाद समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी और सरकार को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर देगी।
सूचनाएं ये भी हैं कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी आज आगरा पहंच सकते हैं। सपा के बड़े नेताओं के दौरे से लग रहा है कि सपा अब इस मुद्दे को गर्माए रखना चाहती है ताकि दलितों को पार्टी से जोड़ा जा सके। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सपा इसे बार-बार पीडीए के सांसद पर हमले के रूप में प्रचारित कर रही है।