मंहगाई पर व्यंग, दीपों में झलका दर्दः दीपोत्सव काव्य गोष्ठी में गूंजी रचनात्मक अभिव्यक्ति
आगरा। साहित्य संगीत संगम, आगरा के तत्वावधान में रविवार को शाहगंज स्थित ग्रीन हाउस में दीपोत्सव काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। दीपावली पर्व की पूर्व संध्या पर आयोजित इस गोष्ठी में शहर के कवियों ने पुरातन काव्य-संदर्भों के माध्यम से दीपोत्सव, सामाजिक विडंबनाओं और मंहगाई जैसे ज्वलंत मुद्दों को मंच पर रचनात्मक अभिव्यक्ति दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ. राजेंद्र मिलन ने की। उन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी में कहा-
“दीप पहले भी जले हैं अब जलेंगे, किंतु मन का अंधेरा न मिटा तो व्यर्थ ये दीपावली है।”
उनकी इन पंक्तियों ने उपस्थित श्रोताओं के मन को गहराई से स्पर्श किया।
डॉ. यशोयश ने दीपोत्सव पर मंहगाई के तीखे व्यंग बाण छोड़े। उनकी चर्चित पंक्तियां-
“चमकी का त्यौहार मगर फटी जेब नंगाई है,
मेरे सिर पर फोड़ धमाके मंहगाई ने दीवाली मनाई है।”
कवि चंद्रशेखर शर्मा ने पर्यावरण को प्रदूषित करते पटाखों पर व्यंग किया और हरित दीपावली का संदेश दिया।
कार्यक्रम में हरीश भदौरिया, रामेन्द्र शर्मा रवि, विनय बंसल, इंदल सिंह इन्दु, डॉ. असीम आनंद, डॉ. राजीव शर्मा निस्पृह, उमाशंकर पाराशर जैसे चर्चित रचनाकारों की उपस्थिति रही, जिन्होंने अपने-अपने काव्य पाठ से दीपोत्सव को साहित्यिक रंगों से सजाया।
कार्यक्रम का संचालन हरीश भदौरिया ने प्रभावशाली ढंग से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन ग्रीनमैन चंद्रशेखर शर्मा द्वारा किया गया।
कविता, व्यंग और सामाजिक संदेशों से सजी इस दीपोत्सव काव्य गोष्ठी ने यह साबित किया कि दीपों की रोशनी केवल घर नहीं, विचारों को भी प्रकाशित करती है।