वृंदावन में केशीघाट स्थित युगल किशोर मंदिर को बचाइए, नहीं तो इतिहास हो जाएगा खंडहर, एएसआई द्वारा की जा रही उपेक्षा पर भड़के सेवायत
वृंदावन। ब्रज वृन्दावन देवालय समिति ने केशीघाट स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित प्राचीन एवं ऐतिहासिक श्री युगल किशोर मंदिर की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए इसके समुचित संरक्षण, नियमित रख-रखाव और श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि इस संबंध में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, आगरा मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् को विस्तृत ज्ञापन भेजकर तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाने की मांग की जाएगी। सेवायतों ने आरोप लगाया कि एएसआई के संरक्षण में होने के बावजूद मंदिर उपेक्षा का शिकार है, जिसके कारण इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गरिमा प्रभावित हो रही है।
ब्रज वृन्दावन देवालय समिति की बैठक पण्डा वाला कुंज में आयोजित हुई, जिसमें ब्रज क्षेत्र के विभिन्न प्राचीन मंदिरों एवं देवालयों के सेवायतों ने भाग लिया। बैठक में केशीघाट स्थित ऐतिहासिक श्री युगल किशोर मंदिर की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए बड़े दाऊजी मंदिर के सेवायत दीपक गोस्वामी ने कहा कि एएसआई द्वारा संरक्षित होने के बावजूद मंदिर की पर्याप्त देखरेख नहीं की जा रही है। संरक्षण और नियमित रख-रखाव के अभाव में मंदिर उपेक्षित अवस्था में पहुंच गया है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
बांके बिहारी मंदिर के सेवायत गोपेश गोस्वामी ने कहा कि मंदिर का मुख्य द्वार अधिकांश समय बंद रहने से श्रद्धालु, देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और शोधार्थी इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर के दर्शन और अध्ययन से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने मंदिर को नियमित रूप से निर्धारित समय पर आम लोगों के लिए खोले जाने की मांग की।
बरसाना के ऊंचा गांव स्थित ललितापीठाधीश्वर गोस्वामी कृष्णानंद भट्ट ने कहा कि मंदिर को प्रतिदिन कम से कम चार घंटे निर्धारित समय के लिए श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए तथा इसकी देखरेख के लिए स्थायी रूप से एक कर्मचारी की नियुक्ति की जाए।
बिहारी जी मंदिर के देव गोस्वामी ने कहा कि मंदिर परिसर और उसके आसपास नियमित सफाई व्यवस्था नहीं होने के कारण गंदगी फैली रहती है, जिससे इस ऐतिहासिक स्मारक की गरिमा प्रभावित हो रही है। उन्होंने परिसर की नियमित सफाई और रख-रखाव सुनिश्चित करने की मांग की।
यमुना मंदिर के सेवायत ब्रजेश शुक्ला ने कहा कि मंदिर के पत्थरों में दरारें पड़ रही हैं तथा मंदिर के शिखर पर पौधे उग आए हैं, जिससे संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा है। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग को तत्काल इसका संज्ञान लेकर संरक्षण कार्य शुरू करना चाहिए।
खादिर वन स्थित गोपीनाथ मंदिर के हरिश्चंद्र गोस्वामी ने मांग की कि इस स्मारक के चारों ओर शीघ्र हेरिटेज बायलॉज लागू किए जाएं, ताकि अनियोजित निर्माण, अतिक्रमण और स्मारक की दृश्य एवं सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
समिति के अध्यक्ष श्री आलोक कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को अपनी जिम्मेदारी का गंभीरता से निर्वहन करते हुए ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते संरक्षण कार्य नहीं हुआ तो आने वाली पीढ़ियां ब्रज की इस अमूल्य धरोहर से वंचित हो सकती हैं।
बैठक में पिसावा वन बिहारी मंदिर के सेवायत श्री भगवत जोशी, काम्यवन के गोपीनाथ मंदिर के सेवायत श्री मनीष गोस्वामी, गदाधर दंत समाधि के सेवायत श्री अनुज शर्मा तथा श्री राधा रमण मंदिर के सेवायत श्री बलराम गोस्वामी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए मंदिर के संरक्षण और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाओं की मांग का समर्थन किया।
बैठक का संचालन जगन्नाथ पोद्दार ने किया, जबकि जयदेव दास ने सभी उपस्थित सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया।