फर्म की आईडी-पासवर्ड से खेला करोड़ों का खेल, आगरा में जीएसटी फर्जीवाड़े से मची खलबली
आगरा के सिकंदरा थाने में एक व्यापारी की फर्म के नाम पर 1.43 करोड़ रुपये के फर्जी जीएसटी बिल और ई-वे बिल बनाकर बड़े घोटाले का मामला दर्ज हुआ है। व्यापारी विष्णु शर्मा ने आरोप लगाया है कि विमल सिंह, हरवंश कटारिया उर्फ हैरी और अभिषेक दुबे ने उनकी फर्म की जीएसटी आईडी और पासवर्ड हासिल कर दुरुपयोग किया। इस फर्जीवाड़े के चलते GST विभाग ने व्यापारी पर 43 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगा दिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश जारी है।
आगरा। ताजनगरी आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र से जीएसटी घोटाले का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने व्यापारिक जगत में हड़कंप मचा दिया है। एक व्यापारी की फर्म की जीएसटी आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग कर आरोपियों ने 1.43 करोड़ रुपये का फर्जी लेनदेन दिखा दिया। इतना ही नहीं, इस फर्जीवाड़े का खामियाजा पीड़ित व्यापारी को भुगतना पड़ा, जब जीएसटी विभाग ने उस पर 43 लाख रुपये से अधिक का भारी जुर्माना लगा दिया। इस मामले में पीड़ित व्यापारी विष्णु शर्मा की तहरीर पर सिकंदरा थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने नामजद आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
फर्म के नाम पर रचा गया करोड़ों का खेल
पीड़ित व्यापारी विष्णु शर्मा ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि उनकी फर्म से जुड़े जरूरी दस्तावेज, जीएसटी लॉगिन संबंधी जानकारी और डिजिटल एक्सेस को आरोपियों ने चालाकी और धोखाधड़ी से हासिल कर लिया। इसके बाद आरोपियों ने उनकी फर्म के नाम पर फर्जी बिल, फर्जी ई-वे बिल और अन्य दस्तावेज तैयार कर 1 करोड़ 43 लाख रुपये से अधिक का कारोबार कागजों में दिखा दिया। व्यापारी का आरोप है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से किया गया, ताकि फर्म का दुरुपयोग कर टैक्स सिस्टम में फर्जी एंट्री की जा सके और आर्थिक लाभ उठाया जा सके।
जीएसटी विभाग ने व्यापारी को ही थमा दिया नोटिस
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि फर्जी लेनदेन का रिकॉर्ड सामने आने के बाद जीएसटी विभाग ने वास्तविक कारोबारी विष्णु शर्मा को ही जिम्मेदार मानते हुए 43 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगा दिया। जब व्यापारी को इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी मिली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने जांच-पड़ताल की तो पता चला कि उनकी फर्म की डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर करोड़ों के फर्जी बिलिंग नेटवर्क को अंजाम दिया गया।
तीन आरोपी नामजद, पुलिस जांच में जुटी
पीड़ित की शिकायत पर सिकंदरा थाने में विमल सिंह, हरवंश कटारिया उर्फ हैरी और अभिषेक दुबे के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है। आरोपियों की भूमिका, फर्जी दस्तावेजों की संख्या, बैंकिंग ट्रेल और जीएसटी पोर्टल पर हुई गतिविधियों की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं इस घोटाले के तार किसी बड़े फर्जी बिलिंग रैकेट से तो नहीं जुड़े हैं।
डिजिटल सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने व्यापारियों के बीच जीएसटी पोर्टल की सुरक्षा, डिजिटल एक्सेस कंट्रोल और फर्म की संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर किसी कारोबारी की जीएसटी आईडी और पासवर्ड गलत हाथों में चले जाएं, तो न सिर्फ फर्जी कारोबार दिखाया जा सकता है, बल्कि असली व्यापारी को कानूनी और आर्थिक संकट में भी फंसाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में व्यापारियों को समय-समय पर अपने जीएसटी लॉगिन, ई-वे बिल हिस्ट्री, रिटर्न फाइलिंग और अधिकृत यूजर एक्सेस की जांच करते रहना चाहिए।